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खेड़ामस्तान गांव में पशुओं में आई महामारी ने बरपाया कहर

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बुढ़ाना। खेड़ामस्तान गांव में पशुओं में आई अजीब महामारी के कारण तीन दिन में पशु पालकों व ग्रामीणों के दो दर्जन से अधिक पशुओं की मौत हो गई। सभी ग्रामीणों के पशु बीमार है। गांव के पशु चिकित्सालय पर ताला लटका रहता है। पशुओं में आई महामारी के कारण ग्रामीणों में अपने पशुओं के प्रति दहशत का माहौल है।
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तहसील क्षेत्र के गांव खेड़ामस्तान में पिछले करीब 15 दिन पहले ग्रामीणों के पशुओं में अजीब किस्म की महामारी ने पशुओं को अपनी चपेट में लिया था। इस महामारी में ग्रामीणों के पशु पहले खुरपका व मुँहपका बीमारी की चपेट में आते है। फिर अचानक निमोनिया का शिकार होकर कुछ ही घंटों में पशु मौत के मुँह में चला जाता है। 15 दिन के अंदर गांव में 60 से 70 पशुओं की मौत हो गई। पिछले करीब तीन दिन में इस अजीब महामारी में ग्रामीण प्रमोद की दो भैंस, रणवीर का भैंसा, शुक्का की एक भैंस, सतपाल की दो गाय, देवेंद्र का भैंसा, सलेख व राजीव कश्यप की एक-एक भैंस, ब्रजवीर के तीन पशु व पूर्व ग्राम प्रधान की दो गाय की देखते ही देखते मौत हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पशु चिकित्सालय होने के बाद भी वहां पर पशु चिकित्सक नही आता। पशु चिकित्सालय में ताला लटका रहता है। पशु चिकित्सालय में घास उगी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण निजी पशु चिकित्सकों व भगवान के भरोसे पर है। विभाग के अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी उनकी बात सुनने कों तैयार नही है।
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- गांव में पशुओं में आई महामारी की सूचना गांव के पशु चिकित्सालय में तैनात पशु चिकित्सक को दी गई। आरोप है कि पशु चिकित्सक फोन नही उठाता। फोन उठाता भी है तो पशु चिकित्सक का कहना है कि उसके पास महामारी का कोई ईलाज नही है। किसी होम्योपैथिक व निजी चिकित्सक से दवाई ले लो। - महिला ग्राम प्रधान पति देवेंद्र उर्फ बिंदर डीलर।
- गांव के पशु चिकित्सालय में तैनात पशु चिकित्सक फोन पर ग्रामीणों की बात सुनने को तैयार नही है। फोन उठाने पर गांव वालों को कहता है कि मेरा ट्रांसफर किसी ओर जगह करवा दो। - पूर्व प्रधान विरेंद्र मलिक।
- गांव के पशुओं में आई महामारी की सूचना विभाग के चिकित्सकों से लेकर उच्चाधिकारियों को दी गई है। विभाग के अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नही है। पशुओं की महामारी के कारण ग्रामीण दहशत में हैं। - ग्रामीण जसबीर मलिक।
- गांव के पशुओं में आई अजीब किस्म की महामारी से हो रही पशुओं की मौत के कारण कई ग्रामीणों के खुंटे खाली हो गए है। पशुओं की मौत के कारण पशु पालक व किसानों को बहुत नुकसान है। सरकार को मामले की जांच करवाकर पशु चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पीड़ित किसान को मुआवजा दिया जाना चाहिए। - ग्रामीण शिवकुमार मलिक।
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