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Muzaffarnagar News: चंबल के बीहड़ की तरह गंगा के खादर में रहा शौकीन गैंग का भौकाल

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मुजफ्फरनगर। नब्बे के दशक में बरला के दो भाइयों शौकीन और शाहनवाज ने गंगा के खादर में चंबल के बीहड़ जैसा भौकाल खड़ा कर दिया था। फिरौती वसूलने के मास्टरमाइंड गैंग गवाहों की अदालत में पहुंचने से पहले ही हत्या कर देते थे। तत्कालीन एसएसपी नवनीत सिकेरा ने 50 हजार के इनामी शौकीन को शहर के प्रकाश चौक पर घेरकर मुठभेड़ में मार गिराया था। वेबसीरीज भौकाल में शौकीन का खौफ भी दिखाया गया है।
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किसान सालिम की हत्या के मामले में दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। असल में यह पूरा मामला नब्बे के दशक में मुजफ्फरनगर को क्राइम कैपिटल का दाग देने से भी जुड़ा है। छपार थाना क्षेत्र के बरला गांव के शौकीन ने अपराध की राह पकड़ी तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
उसने अपने गैंग में अपने भाई शाहनवाज को भी शामिल कर लिया था। गैंग फिरौती वसूलने में माहिर था। कोल्हू संचालकों, ईंट भट्ठा मालिकों और किसानों को बंधक बनाकर रुपये लिए जाते थे।
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अपहरण को गंगा और गंगनहर के खादर के बीच भोपा से लक्सर के बीच फैले करीब 100 हेक्टेयर के जंगल में छिपा दिया जाता। बरला में 15 जनवरी 1999 को गवाह दिनेश त्यागी की बसेड़ा-खाईखेड़ी मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्राॅली में गन्ने लादते समय इसी गैंग ने हत्या कर दी थी।
बरला के किसान विष्णु त्यागी को सिर्फ इसलिए मार दिया गया था कि वह दोपहर के समय खेतों में जाता था, जबकि गैंग ने खेतों में आने पर टोकाटाकी की थी।

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फिरौती, लूट, डकैती और खुलेआम हत्याएं
शौकीन गैंग ने साल 1995 से 2009 तक वारदात अंजाम दी। बरला के ही फोटोग्राफर भाइयों का अपहरण चर्चित रहा। हाईवे पर बस लूट की कई वारदात गिरोह ने अंजाम दी। अकेले शाहनवाज पर ही 26 प्राथमिकी दर्ज है। साल 2003 में प्रकाश चौक पर शौकीन को मुठभेड़ में मारा गया था।
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