उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में किसानों की महापंचायत जिस सरकार के खिलाफ हुई, वह सरकार चली गई। 2003 से लेकर 2013 की पंचायतों का यही इतिहास है। अब देखना यह है कि 2021 में हुई इस महापंचायत के 2022 के चुनाव में क्या परिणाम होंगे।
भारतीय किसान यूनियन से जुड़े किसान जिस सरकार के खिलाफ एकजुट हुए हैं, वह सरकार सत्ता से बाहर होती रही है। कारण कुछ भी बना हो, लेकिन इतिहास यही है। चार फरवरी 2003 में जीआईसी के मैदान पर भाकियू की महापंचायत बसपा की मायावती सरकार के खिलाफ हुई थी। भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत पर कलेक्ट्रेट में हुए लाठीचार्ज के विरोध में किसान जुटे थे। इसके बाद हुए चुनाव में मायावती सत्ता से बाहर हो गई थीं।