तालाबों की जमीन को मुक्त कराने का अभियान तेज
मुजफ्फरनगर। एनजीटी और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद तालाबों की जमीन को मुक्त कराने का अभियान तेज हो गया है। जिले की चार तहसीलों में 1009 तालाबों की भूमि को एसडीएम और तहसीलदार पिछले 48 सालों में कृषि और आबादी में दर्ज कर चुके हैं। तालाबों की मूल नौय्यत को बदल दी गई। अब पुराने सभी आदेशों को निरस्त कर इन जमीनों को फिर से तालाबों में दर्ज किया जा रहा है। 471.08 हेक्टेयर जमीन पर एक साथ कार्रवाई चल रही है। इससे जिले में लगभग एक लाख लोग प्रभावित होंगे।
वर्ष 1972 में चकबंदी की प्रक्रिया के बाद पानी से सूखे तालाबों को तहसीलदार और एसडीएम के स्तर से कृषि में दर्ज कर दिया गया, जो तालाब गांव के अंदर आ गए उन्हें आबादी में दर्ज कर दिया गया। जिले में लगभग 1009 तालाबों की नौय्यत बदलने का कार्य अब तक हुआ। एनजीटी और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद डीएम ने सभी एसडीएम को इन तालाबों को पुरानी स्थिति में रिकार्ड में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। 1359 फसली के हिसाब से सभी तहसीलों में रिकार्ड दुरुस्त हो रहा है। इन तालाबों की अधिकतम जमीन आबादी में है। इनमें जिन लोगों के मकान हैं, ऐसे हजारों लोगों को एसडीएम के यहां से नोटिस जारी किया गया। एक जनवरी से चल रही इस कार्रवाई में चारों तहसीलों में उन सभी तालाबों के निरस्तीकरण की कार्रवाई पूरी कर दी गई, जिनमें कोई आपत्ति नहीं आई है। सदर तहसील में 560 तालाब में 27 तालाबों को कब्जा मुक्त करा लिया गया है। 83 तालाबों में निरस्तीकरण के लिए नोटिस जारी हुए। 31 तालाबों को नौय्यत बदल कर उनके मूल स्वरूप में दर्ज कर दिया गया है। खतौली तहसील में 44 तालाबों में कार्रवाई चल रही है। यहां नौ तालाब खाली करा लिए गए हैं। 35 तालाबों को कृषि और आबादी की नौय्यत बदलकर मूल रूप में दर्ज कर दी गई है। इसी तरह जानसठ तहसील में 214 तालाबों में से 12 तालाब खाली करा लिए गए हैं, बाकी को मूल रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। बुढ़ाना में 191 तालाब में से 15 तालाब खाली करा लिए गए हैं। अन्य को मूल रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।
जनपद में 4188 तालाब
मुजफ्फरनगर। जिले में 1359 फसली रिकार्ड के अनुसार 4188 तालाब हैं। इन तालाबों का क्षेत्रफल 2193.21 हेक्टेयर हैं। इनमें 2412 तालाब ऐसे हैं, जो अतिक्रमण मुक्त हैं। इनका क्षेत्रफल 1247 हेक्टेयर है। जनपद में 732 तालाब ऐसे हैं, जिनमें मत्स्य पालन हो रहा है। इनका क्षेत्रफल 730.46 हेक्टेयर है। 1009 तालाबों पर अतिक्रमण है, इनका क्षेत्रफल 471.08 हेक्टेयर है।
इन गांवों में मूल अभिलेखों में आए तालाब
मुजफ्फरनगर। सदर तहसील में 40 साल पहले तक के तालाबों को कृषि और आबादी में दर्ज करने के आदेशों को एसडीएम दीपक कुमार ने निरस्त कर दिया है। इन तालाबों को 1359 फसली के रिकार्ड के हिसाब से मूल स्वरूप में दर्ज किया गया। इनमें शहर से सटे सरवट के ही पांच तालाब शामिल हैं। इन तालाबों की जमीन पर सैकड़ों मकान बने हैं। लुहारी खुर्द में चार, निवादा में दो, मेघाखेडी में दो, रेई में दो, दधेडू खुर्द में एक, सैद नगला, नंगलाराई, बसेडा, हरसौली, पीपलहेडा, अलीपुर, खुड्डा गांव के एक-एक तालाब को मूल रूप में रिकार्ड में दर्ज किया गया। अधिकतम तालाबों की जमीन में इस समय मकान बने हैं।
पूरे जिले में चला है अभियान: अमित
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि जिन तालाबों को तहसीलदार और एसडीएम के स्तर से कृषि भूमि और आबादी में दर्ज किया गया था, उस कार्रवाई को अवैधानिक माना गया है। नौय्यत बदलने के आदेशों को एसडीएम के न्यायालय में निरस्त किया जा रहा है। 1359 फसली रिकार्ड के हिसाब से ही तालाबों को मूल अभिलेखों में अंकित किया जा रहा है।