जिंदा निकली पेंशन की फाइल में दफनाई गई बूंदी
मुजफ्फरनगर। यह कहानी बुजुर्ग बूंदी की है। विधवा, बेऔलाद, बेघर और बेपरिवार बूंदी की। खतौली के मिट्ठूलाल मोहल्ले में पड़ोसियों की मदद और वृद्धावस्था पेंशन के सहारे जिंदगी गुजार रही बूंदी को सरकारी नुमाइंदों ने पेंशन के वार्षिक भौतिक सत्यापन में मृत दर्शाकर पेंशन रोक दी। फाइलों में दफनाई गई बूंदी खुद दफ्तर-दफ्तर चक्कर काटकर जिंदा होने का सुबूत देती रही, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एसडीएम तक मामला पहुंचा तो जांच में बूंदी जिंदा निकली।
समाजसेवी जमीन अंसारी के साथ बृहस्पतिवार को बुजुर्ग बूंदी (85) एसडीएम खतौली जीत सिंह राय के सामने हाजिर हुई और खुद को जिंदा बताते हुए पीड़ा सुनाई। एकबारगी उपजिलाधिकारी भी हैरान रह गए। त्वरित कार्रवाई करते हुए लेखपाल अजेंद्र सिंह राठी को बुलाकर मामले की जांच के आदेश दिए। लेखपाल ने महिला के नाम से जारी आधार कार्ड देखा। भौतिक सत्यापन का वह कागज भी देखा, जिसमें महिला को मृत दर्शाया गया था। करीब एक घंटे की जांच के बाद माना गया कि तहसील पहुंची बुजुर्ग महिला बूंदी ही है और जिंदा है। लेखपाल ने रिपोर्ट एसडीएम को भेजी तो फाइलों में बुजुर्ग महिला फिर से जिंदा हो गई।
अरे भाई...मै तो खतौली के सहारे जिंदा हूं
बुजुर्ग बूंदी (85) कमजोर हो गई है। लेखपाल जिस समय जांच कर रहे थे, तब महिला ने कहा कि मेरे पड़ोसी और मेरा खतौली मेरी मदद करता है। मै तो भाई दुखों के पहाड़ देखकर भी जिंदा हूं...अभी नहीं मरी।
लेखपाल और कानूनगो को नोटिस
एसडीएम जीत सिंह राय ने बताया कि प्रकरण की जांच कराई गई है। तत्कालीन लेखपाल और कानूनगो को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। बूंदी की पेंशन बहाली के आदेश दिए गए हैं।
मैने जांच की, जिंदा है बूंदी
लेखपाल अजेंद्र सिंह राठी का कहना है कि प्रकरण की जांच की गई है। बूंदी जिंदा है। किसी वजह से उसे सत्यापन में मृत बताया गया था, मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
ऐसे कर्मचारियों को मिले सजा
स्पेयर पार्ट्स की दुकान चलाने वाले समाजसेवी जमील अंसारी कहते हैं कि बुजुर्ग बेसहारा है। सभी लोग उसकी मदद करते रहते हैं। जिन कर्मचारियों ने उन्हें जिंदा रहते हुए मृत बता दिया, ऐसे कर्मचारियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।
बूंदी- फोटो : MUZAFFARNAGAR