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सियासी उलट-फेर की दस्तक दे गई पंचायत

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मुजफ्फरनगर के राजकीय कालेज के मैदान में किसान महापंचायत मंचासीन सपा, कांग्रेस पार्टी पदाधिकारी? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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दंगे के बाद पहली बार दिखा साझा मंच
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मुजफ्फरनगर। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पर दर्ज मुकदमे और कृषि कानून के विरोध में महापंचायत में उमड़ी भीड़ ने किसान आंदोलन को संजीवनी दे गई। आठ साल पहले जिले में भड़के दंगे के बाद पहली बार भाकियू के बैनरतले विपक्षी दलों ने गिले-शिकवे भूलकर एक साथ मंच साझा कर भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ा दी है। महापंचायत में विपक्षी पार्टियों के बड़े मुस्लिम चेहरे जुटे उससे ये सवाल उठना लाजिमी है।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद पहली बार ऐसा मौका आया, जब रालोद, सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ मुस्लिम किसान नेताओं ने मंच साझा किया है। सात सितंबर, 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुई हिंसा में 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत ही नहीं हुई, बल्कि पचास हजार से ज्यादा खौफजदा लोगों ने गांव छोड़कर शिविरों में शरण ली थी। आपसी अविश्वास बढ़ता गया और वेस्ट यूपी में राजनीति के नए समीकरण बनते गए। राष्ट्रीय लोकदल का जाट-मुस्लिम वोट गणित ध्वस्त हो गया। ध्रुवीकरण के दम पर भाजपा नई ताकत बन गई। चाहकर भी बीते आठ साल में ऐसा कोई अवसर नहीं नजर आया, जब जाट और मुस्लिम तथा अन्य विपक्षी दलों के नेता एकमंच पर एकजुट हुए हों।
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ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हुए उपद्रव के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर योगी सरकार के कड़े तेवर और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं ने दंगे से बनी खाई भरने का मौका भी दे दिया। महापंचायत में पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश पहुंचे। दंगे की वजहों को लेकर अखिलेश सरकार में अमीर आलम बड़े सवालों के घेरे में थे। फिलहाल वे रालोद में हैं। कैराना के विधायक नाहिद हसन और मीरापुर सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हाजी लियाकत ने जहां मौजूदा किसान आंदोलन में एकजुट होकर लड़ने की बात रखी, वहीं सहारनपुर से आए वरिष्ठ कांग्रेस के पूर्व विधायक इमरान मसूद तथा विधायक मसूद अख्तर ने योगी सरकार को उखाड़ने के लिए लामबंद होने का आह्वान किया। कभी भाकियू सुप्रीमो चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के खास रहे गुलाम मोहम्मद जौला दंगे के उपरांत पूरी तरह मुस्लिम किसान राजनीति तक सिमट गए थे। वे भी भाकियू के मंच पर आज कह गए कि गलतियां दोनों तरफ से हुई हैं। पहली गलती, जाट और मुस्लिमों में हिंसा हुई और दूसरी गलती, रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह को लोकसभा चुनाव में हराना साबित हुई। जौला ने भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को मंच पर एक साथ खड़ा करके उनके के कंधों पर हाथ रखकर कसम दिलाई कि जाति व धर्म से ऊपर उठकर किसान अपने हकों के लिए एकजुट हो जाए। जाट और मुस्लिमों के बीच दंगे की खाई यदि पट गई तो भाजपा को विधानसभा चुनाव में मनमाफिक परिणाम हासिल करने में मुश्किलें आ सकती है।
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