भोकरहेड़ी के नाम से भी हुआ था चुनाव
मीरापुर क्षेत्र के भोकरहेड़ी सीट से भी एक चुनाव हुआ था। 1962 में सुरक्षित सीट भोकरहेड़ी से शुगनचंद मजदूर विधायक बने थे। बाद में परिसीमन में यह सीट खत्म हो गई थी।
तीसरी पीढ़ी के चंदन चौहान लड़ें चुनाव
मोरना से लगातार दो बार जीत हासिल करने वाले सूबे के डिप्टी सीएम रहे नारायण सिंह के बेटे स्वर्गीय संजय चौहान भी यहीं से 1996 में सपा से विधायक रहे थे। इस बार तीसरी पीढ़ी के चंदन चौहान मीरापुर सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
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मोरना-मीरापुर में मुस्लिम जमाते रहे अखाड़ा
पहले मोरना और फिर मीरापुर विधानसभा में मुस्लिम जीतते रहे हैं। 1980 में मेहंदी असगर उर्फ मटरू मियां जनता दल सेक्यूलर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1985 में कांग्रेस से सईदुज्जमां, 1989 में जनता दल से अमीर आलम, 2007 में रालोद से कादिर राना और 2012 में बसपा से मौलाना जमील जीते हैं।
जब-जब चली लहर तो जीत गई भाजपा
मोरना और मीरापुर में जब-जब लहर चली, तब-तब भाजपा जीत गई। 1991 और 1993 में रामपाल सिंह भाजपा लहर में जीते। 2017 में फिर लहर चली तो अवतार भड़ाना जीत गए।