न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा किसानों के साथ धोखा: टिकैत
मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों के साथ धोखा बताया है। केंद्र सरकार का किसानों के साथ यह मजाक है। उन्होंने कहा कि करनाल लघु सचिवालय पर किसानों का धरना जारी रहेगा। हरियाणा के करनाल में प्रशासन के साथ किसानों की वार्ता बेनतीजा रही है। लघु सचिवालय करनाल पर किसानों का धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक किसानों को न्याय नहीं मिल जाता।
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा फसलों की खरीद को सीजन 2022-23 की खरीद को जो न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है वह किसानों के साथ सबसे बड़ा मजाक है। कृषि मूल्य आयोग द्वारा पिछले साल गेहूं की पैदावार की लागत बताई गई 1449 जो इस बार घटाकर एक हजार कर दी गई है, इससे बड़ा मजाक कुछ हो नहीं सकता। अगर महंगाई दर की बात करें तो इस वर्ष छह प्रतिशत महंगाई में वृद्धि हुई है. जिस तरह से पिछले वर्ष समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया था। अगर उस फार्मूले को भी लागू किया जाए तो किसानों को 71 रुपये कम दिए गए हैं, जो कि सरकार एमएसपी को बड़ा कदम बता रही है। उसने किसानों की जेब को काटने का काम किया है।
भाकियू नेता ने कहा कि सरकार को किसानों को यह भी बताना चाहिए कि पंतनगर विश्वविद्यालय, लुधियाना विश्वविद्यालय और जो दूसरे गेहूं उत्पादन करने वाले अनुसंधान केंद्र हैं उनकी क्या लागत आती है? किसानों के साथ सरकारों द्वारा हमेशा अन्याय किया जाता रहा है। 1967 में 2.5 क्विंटल गेहूं बेचकर एक तोला सोना खरीद की जा सकती थी, आज अगर किसान को एक तोले सोने की खरीद करनी हो तो 25 क्विंटल गेहूं बेचने की आवश्यकता है, असली अन्याय यही है किसानों के साथ।