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श्मशान घाटों पर रहेगी प्रशासन की नजर

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श्मशान घाटों पर रहेगी प्रशासन की नजर
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मुजफ्फरनगर। मुरादनगर की घटना के बाद जिले का प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है। निकायों के साथ ग्रामीण अंचल के श्मशान घाटों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। कहीं हालत जर्जर तो नहीं है इसकी जांच पंचायत सचिव से लेकर एसडीएम तक करेंगे।
एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि शहर में मुख्य रूप से दो श्मशान घाट हैं, दोनों की स्थिति ठीक है। यहां सरकारी पैसे से कुछ नहीं बना है। समाज के सहयोग से ही निर्माण हुए हैं। जिले की स्थानीय निकायों में ईओ और गांवों में पंचायत सचिवों से श्मशान घाट को एक बार जाकर देखकर स्थिति बताने के लिए कहा गया है। यदि कहीं हालत ठीक नहीं है तो उसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को देंगे। प्रशासन का यह प्रयास है कि मुरादनगर जैसी घटना कहीं दूसरी जगह न हो। जनपद के किसी गांव में यदि श्मशान घाट जर्जर हालत में मिलता है तो उसका निर्माण कराया जाएगा।
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मुरादनगर के चेयरमैन को बचा रही सरकार
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक चौधरी गुर्जर ने मुरादनगर में मौत के जिम्मेदार चेयरमैन को बचाए जाने का प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है।
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अभिषेक चौधरी ने कहा कि गाजियाबाद प्रशासन द्वारा अधिशासी अधिकारी, जूनियर इंजीनियर और ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज करना सिर्फ खानापूर्ति है। पूरे प्रकरण का मुख्य दोषी चेयरमैन हैं, जिसके इशारे पर सारा भ्रष्ट तंत्र चल रहा था। उन्होंने कहा कि चेयरमैन को मुकदमे में नामजद न करना दर्शा रहा है कि सरकार और प्रशासन 25 सामाजिक व्यक्तियों की मौत के बाद भी कुंभकर्णी नींद में सोया है। राष्ट्रीय लोकदल मुख्यमंत्री से मांग करता है कि मुरादनगर हादसे में मृतकों के परिजनों को 15-15 लाख रुपये एवं घायलों का संपूर्ण इलाज का जिम्मा सरकार ले। साथ ही मौजूदा चेयरमैन को मुख्य हत्यारोपी बनाया जाए, ताकि प्रदेश में कोई दूसरा ऐसा हादसा न हो।
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