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मथुरा जंक्शन पर खौफनाक मंजर, थे सबके सब अवाक और सन्न

Sat, 31 Aug 2013 03:35 AM IST
मथुरा/ब्यूरो
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से अमृतसर जा रही छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के जनरल कोच में रुनकता के निकट यात्रियों पर तीन लोगों ने कृपाण से कातिलाना प्रहार कर दिया।
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हमले में एक यात्री की मौत हो गई जबकि चार यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल मथुरा में भर्ती कराया गया है। हमलावर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बताते हैं कि आरोपियों के साथ किसी अन्य ट्रेन में इन युवकों ने अभद्रता की थी।

छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस शुक्रवार को आगरा से अमृतसर के लिए रवाना हुई थी। जरनल कोच में आगरा से नीली पगड़ी और नीले वस्त्र पहने तीन लोग चढे़। वह आपस में ही कुछ बुदबुदा रहे थे।
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प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इनका आक्रोश कुछ लड़कों पर था। आगरा से कुछ दूरी पर रुनकता के पास इसमें से एक ने अचानक कृपाण निकालकर आसपास बैठे यात्रियों पर वार करना शुरू कर दिया।

इसके बाद उसके अन्य साथी भी तत्काल कृपाण निकाल वार शुरू कर दिया। हमले में पांच यात्री प्रताप सिंह पुत्र अतर सिंह निवासी थाना कोसीकलां मथुरा, सच्चिदानंद पुत्र डीपी मिश्रा निवासी शिव नगर भोपाल, विदुर पुत्र मोती राम निवासी सुजानगढ़ी थाना केलारस मुरैना मध्यप्रदेश, सोनेराम पुत्र मोती राम सुजानगढ़ी थाना केलारस मुरैना मध्यप्रदेश, पुष्कर लवानियां पुत्र अशोक लवानियां अशोक विहार मथुरा गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में विदुर और सोनेराम भाई हैं।

यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन को रुनकता के निकट रोक दिया। घटना को मुख्य रूप से अंजाम देने वाले ने भागने की कोशिश की लेकिन यात्रियों ने उसे रुनकता में पकड़ लिया और वहीं बैठा लिया।

बाकी दो आरोपी पपेन्द्र सिंह निवासी बेमनकोलिंग थाना तरामगी दमादम, भटिंडा और गिरिजानंद सिंह निवासी थाना जोठकिया जिला मानसा, पंजाब को मथुरा पहुंचने पर हिरासत में लिया गया है। घायलों को उपचार के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल ले जाया गया।

यहां प्रताप सिंह को मृत घोषित कर दिया है। बताया जा रहा है कि खूनी खेल के आरोपियों के साथ किसी अन्य ट्रेन में कुछ लड़कों ने अभद्र व्यवहार किया था। उन्होंने उक्त ट्रेन को छोड़कर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से यात्रा शुरू की।

मथुरा जंक्शन का खौफनाक मंजर
शाम के 5:30 बजे थे और मथुरा जंक्शन का प्लेटफार्म नंबर दो मिनी हास्पिटल का रूप धारण कर चुका था। यहां डाक्टर, चिकित्सीय स्टाफ सबकी निगाहें बार-बार आगरा की ओर देख रही थीं। ठीक 5:45 बजे पर ट्रेन आई तो खून से लथपथ लोगों को बाहर निकाला गया।

आंखें खुद खौफनाक मंजर बयां कर रही थीं। सबके सब अवाक थे, सन्न थे और कुछ डर के मारे कांप रहे थे।

इंजन के पास वाली जनरल बोगी में चिकित्सीय स्टाफ, सुरक्षा जवान घुसे। पलभर की देरी किए बगैर सभी घायलों को उतार लिया गया। कोसीकलां के प्रताप सिंह मरणासन्न थे लेकिन डाक्टरों को उम्मीद बाकी थी। लिहाजा तुरंत उनके हार्ट को सक्रिय करने की कोशिश की गई लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्लेटफार्म पर दहशत का ठहराव हो चुका था।

गंभीर रूप से घायल मध्यप्रदेश के सच्चिदानंद ने पहला वार झेला था। वह खून से लथपथ थे। बोले, दूसरे वार में हमने कृपाण पकड़ लिया। इसके बाद आरोपियों ने अन्य यात्रियों पर हमला शुरू कर दिया।

गंभीर रूप से अशोक विहार मथुरा के घायल पुष्कर लवानियां की तड़प देख कई यात्रियों की आंखें बरसने लगी थीं। अन्य घायलों को जल्दी-जल्दी स्ट्रेचर से लेकर जिला अस्पताल की ओर ले जाने में स्टाफ के लोग जुटे थे। कुछ यात्रियों पर पड़े खून के छींटे दहशत भरे सफर की गवाही दे रहे थे। घायल की जिंदगी का सफर इलाज की ओर चल पड़ा था।
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घड़ी की सुई भी 6:00 बजे की ओर थी। ट्रेन की खिड़कियों से सहमी निगाहें झांक रही थीं। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का हार्न बजा। खूनी यादें लेकर धीरे-धीरे आगे बढ़कर ट्रेन कुछ ही पलों में आंखों से ओझल हो गई। अब प्लेटफार्म पर दहशत थी, खून के कुछ छींटे थे और रेलवे के असुरक्षित होते सफर पर आम आदमी की बहस थी।
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