मुलायम के सियासी कुनबे में एक और एंट्री हो गई है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के भाई और लोक निर्माण मंत्री के पुत्र आदित्य यादव भी सियासत में आ गए। यह बात दीगर है कि उन्होंने सियासत के पहले पायदान पर चढ़ने के लिए सहकारिता को माध्यम बनाया है। वह मंगलवार को प्रदेशीय को-ऑपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) के सभापति चुन लिए गए।
सियासी लिहाज से सूबे के सबसे संपन्न इस परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव कई बार विधायक, प्रदेश व केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। वह सूबे के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे और अब लोकसभा में सांसद हैं। उनके पुत्र अखिलेश यादव पहले सांसद थे और अब पिता की विरासत संभालते हुए सूबे के मुख्यमंत्री हैं। अखिलेश विधान परिषद के सदस्य भी हैं।
मुलायम के भाई प्रो. रामगोपाल यादव राज्यसभा के सांसद हैं। दूसरे भाई शिवपाल सिंह यादव कई बार के विधायक व प्रदेश सरकार में सबसे अधिक महकमों के मंत्री हैं। मुलायम का एक भतीजा धर्मेन्द्र यादव बदायूं से सांसद है। सपा सुप्रीमो की बहू और मुख्यमंत्री की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से लोकसभा की सदस्य हैं।
प्रो. यादव के पुत्र अक्षय को लोकसभा की फिराजोबाद सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला किया जा चुका है। वह मुलायम घराने के सियासत में प्रवेश करने वाले सातवें सदस्य हैं। अगर लोकसभा चुनाव जीत जाते हैं तो वह इस घराने से पांचवें सांसद होंगे।
अब शिवपाल के पुत्र आदित्य पीसीएफ के सभापति के जरिए सियासत में आ गए हैं। वह सियासत के पायदान पर चढ़ने वाले मुलायम परिवार के आठवें सदस्य हैं। ताज्जुब नहीं कि विधानसभा के अगले चुनाव या उससे पहले होने वाले अन्य किसी चुनाव में उन्हें भी विधानसभा या अन्य किसी सदन का रास्ता दिखा दिया जाए।