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थाने के गेट पर ही दम तोड़ा गया अदालत का आदेश, केस से आरोपी नाम और धाराएं

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मुरादाबाद। मझोला थाना पुलिस ने अदालत के आदेश को ही दरकिनार कर दिया है। अदालत के आदेश पर दर्ज किए केस से आरोपी का नाम और धाराएं ही गायब कर दीं गई हैं। पीड़ित को इसकी जानकारी हुई तो उसने एसएसपी से थाना प्रभारी की शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर सीओ ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पीड़िता के बयान दर्ज किए हैं।
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मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थानाक्षेत्र निवासी पीड़ित युवती ने अदालत में दाखिल प्रार्थनापत्र में बताया कि वह बागपत जनपद के बड़ौत स्थित क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान में ग्राम विकास अधिकारी/ प्रदर्शक के पद पर तैनात है। पीड़ित ने संस्थान के उप निदेशक डॉ. सौरभ राजपूत पर मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि 17 दिसंबर 2020 को उप निदेशक कार्यालय में पहुंचे और गलत कार्य करना चाहा। इस मामले की जांच चल रही है।
पीड़िता ने बताया कि वह 18 फरवरी 2021 को वह अपनी बड़ी बहन के साथ बुुआ के घर जा रही थी। मझोला थानाक्षेत्र में रास्ते में कार सवार चार युवक आ गए। आरोप है कि ये लोग सौरभ राजपूत ने भेजे थे। चारों आरोपी उसे कार में खींचने लगे। एक आरोपी ने जाति सूचक शब्द कहते हुए कहा कि तेरे चेहरे पर तेजाब डाल देंगे। इसके अलावा एक आरोपी ने कहा कि सौरभ भाई के खिलाफ जाएगी तो अंजाम बुरा होगा।
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अदालत ने मझोला थाने से इस मामले में रिपोर्ट मांगी। तब थाने से इस संबंध में कोई रिपोर्ट पहले से दर्ज न होने की जानकारी दी गई। अदालत ने प्रार्थनापत्र पर सुनवाई करते हुए कहा कि वादिनी के प्रार्थनापत्र से गंभीर संज्ञेय अपराध कारित होना प्रकट होता है। इस संबंध में पुलिस से विवेचना कराया जाना न्याय संगत होगा। अदालत ने चार सितंबर को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।
मझोला पुलिस ने केस तो दर्ज किया, लेकिन उससे आरोपी का नाम और गंभीर धाराएं गायब कर दीं। पीड़ित ने इस संबंध में एसएसपी बबलू कुमार को प्रार्थनापत्र देकर थाना प्रभारी की शिकायत की। जिस पर एसएसपी ने संज्ञान लिया और सीओ सिविल लाइंस इंदु सिद्धार्थ को जांच के आदेश दिए। सीओ ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पीड़ित युवती के बयान भी दर्ज किए हैं।
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