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इस दरख्त की जड़ में जहर डालने वाले लोग अपने हैं: आजम खां

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इस दरख्त की जड़ में जहर डालने वाले लोग अपने हैं: आजम खां
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सीतापुर जेल से रिहा होकर घर पहुंचे आजम खां ने समर्थकों के बीच रखी अपनी बात, घर से
रामपुर। सीतापुर जेल से रिहा होने के बाद रामपुर पहुंचे आजम खां ने जहां सुप्रीम कोर्ट और समर्थकों का शुक्रिया अदा किया वहीं कुछ अपनों पर निशाना भी साधा। कहा कि इस दरख्त की जड़ में जहर डालने वाले लोग अपने हैं। समर्थकों से बात करते हुए जेल और राजनीति के अनुभव साझा किए और अपना दर्द बयां किया।
आजम खां ने अपने घर के पास स्थित मुमताज पार्क के निकट समर्थकों से बात की। कहा कि इस दरख्त की जड़ों में जहर डालने वाले लोग अपने हैं, हम आपके सामने जिंदा खड़े हैं, ये किसी आश्चर्य से कम नहीं है। हमें जहां रखा गया था उस कोठरी में अंग्रेजों के जमाने में उन लोगों को रखा जाता था जिन्हें दो-तीन दिन बाद फांसी होनी होती थी। हमारी कोठरी के पास ही फांसीघर था। हमारे बच्चे और पत्नी के आ जाने के बाद हम अकेले रह गए थे, बस दीवार और छत थी। रात होती थी तो सुबह का तसव्वुर रहता था और सुबह को शाम का तसव्वुर होता था। इस तरह आपसे जुदा होकर समय गुजारा है। हमारे रिश्तों में तसव्वुर ही नहीं था कि हम और आप जुदा होंगे।
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कहा कि बहुत कम उम्र में इमरजेंसी के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विवि की यूनियन के सचिव थे और करीब पौने दो साल के लिए जेल जाना पड़ा था। जब जिंदगी की शुरुआत थी तब भी हालातों ने कुर्बानी ली और आज भी हालात कुर्बानी ले रहे हैं। इंसाफ करने वालों का शुक्रिया, जिन्होंने साबित किया कि अभी इंसाफ पसंदगी जिंदा है।
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कहा कि तारीख को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है लेकिन, मिटाया नहीं जा सकता। हमारे साथ जो हुआ, हमारे घर, खानदान, शहर और जिले के साथ हुआ। फिर बोले, चमन बसाए जाते हैं उजाड़े नहीं जाते, ये चमन किस प्रकार उजाड़ा गया है ये आनी वाली नस्ल पर भी असर डालेगा। ये चमन सिर्फ इसलिए उजाड़ दिया गया क्योंकि यहां तुम्हारी आबादी और गिनती ज्यादा है। नाम बदल देने से अकीदा, यकीन और इमान नहीं बदलता है। जुल्म और जालिम की मुद्दत लंबी नहीं होती और जब जुल्म खत्म होता है तो जालिम भी खत्म हो जाता है। हमारा-आपका साथ 40 साल लंबा है, हमारी-आपकी मोहब्बत कम नहीं होगी। हमारी भी तो कोई मंजिल होगी, क्या हमारी कोई मंजिल नहीं।
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