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इंटर बटालियन फायरिंग कंपटीशन में शाहजहांपुर की टीम अव्वल

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मुरादाबाद पीटीसी इंडोर फायरिंग रेंज में फायरिंग कंपटीशन में निशाना साधते एनसीसी केड्स। संवाद - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। यहां पीएसी इंडोर शूटिंग रेंज पर बरेली ग्रुप के एनसीसी कैडेट्स के हुए इंटर बटालियन फायरिंग कंपटीशन में बेहतर प्रदर्शन के कारण 25 बटालियन शाहजहांपुर की टीम अव्वल रही। 33 बटालियन अमरोहा को दूसरा और 9 बटालियन मुरादाबाद को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
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कमांड अधिकारी 23 बटालियन कर्नल एमपी सिंह और 9 यूपी गर्ल्स बटालियन के कमांड अधिकारी कर्नल राजेश मिश्रा की देख रेख में शुक्रवार को हुई इस प्रतियोगिता में शाहजहांपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, धामपुर और अमरोहा के 72 एनसीसी छात्र, छात्राओं ने अपने निशाने का प्रदर्शन किया।
कर्नल राजेश मिश्रा ने बताया कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 12 प्रतियोगियों का नाम बरेली उच्चाधिकारियों के पास नाम फाइनल करने के लिए भेज दिया गया है। इनमें छह छात्राएं व इतने ही छात्र हैं। इनमें से पांच छात्राओं व पांच छात्रों के नामों का चयन सितंबर माह के प्रथम सप्ताह में फतेहगढ़ में होनी वाले यूपी डायरेक्ट्रेट कंपटीशन के लिए किया जाएगा।
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इन 12 एनसीसी कैडेट छात्र-छात्राओं में से चार कैडेट्स मुरादाबाद के शामिल हैं। उन्होंने बताया कि चयनित छात्राओं के नाम की घोषणा बरेली से एप्रूवल मिलने के बाद की जाएगी। इससे पहले एनसीसी के सभी कैडेट्स को प्वाइंट-22 बोर की रायफल से निर्धारित टार्गेट पर निशाना लगाने का मौका दिया गया। सभी निशानेबाज अभ्यर्थियों ने 15-15 राउंड फायरिंग की।
एनसीसी की हो अपनी शूटिंग रेंज : राजेश मिश्रा
मुरादाबाद। एनसीसी 9 बटालियन के कमांड अधिकारी कर्नल राजेश मिश्र ने कहा कि एनसीसी कैडेट्स में काफी कैडेट्स ऐसे हैं जिन्हें नियमित अभ्यास और गाइडेंस का मौका मिले तो वह न सिर्फ अच्छे नागरिक बनेंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज भी साबित होंगे।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को यहां संपन्न हुई इंटर बटालियन कंपटीशन में भाग लेने वाले सभी 72 एनसीसी छात्र-छात्राओं में से अधिकांश छात्र-छात्राओं का निशाना काफी बेहतर रहा है। कैडेट्स को भी मुरादाबाद में एनसीसी की अपनी शूटिंग रेंज न होने की कमी खली है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कहीं भी एनसीसी की अपनी शूटिंग रेंज नहीं है। जबकि अन्य कई प्रदेशों में एनसीसी की अपनी शूटिंग रेंज है। उन्होंने कहा कि खुद की शूटिंग रेंज न होने से एनसीसी कैडेट्स को अपना निशाना साधने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कंपटीशन के लिए भी दूसरे विभागों की शूटिंग रेंजों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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