मुरादाबाद। मुरादाबाद के ‘डेडमैन’ के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। सीओ की ओर से नगर निगम और एमडीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि बताएं कि अब्दुल रफीक द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों का सच क्या है।
सिविल लाइंस के कपूर कंपनी तिराहे हैलेट रोड निवासी अब्दुल रफीक खां एसएसपी कार्यालय में प्रार्थना में दिया था। जिसमें अब्दुल रफीक ने बताया कि 17 नवंबर 1998 में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण(एमडीए) की ट्रांसपोर्टर नगर योजना श्रेणी डी में 7.50 वर्गमीटर क्षेत्रफल के भूखंड का आवंटन उनके नाम पर हुआ था। इसके बाद से वह लगातार केनरा बैंक की शाखा में किस्तें जमा करके भूखंड की कीमत अदा कर रहे हैं। नौ मार्च 2009 में उसने अंतिम किस्त जमा की थी। इसके बाद वह आर्थिक परेशानी से वह भूखंड की रजिस्ट्री अपने नाम नहीं करा सके थे। वर्ष 2021 में उन्होंने एमडीए दफ्तर में प्रार्थनापत्र दिया कि अब भूखंड की रजिस्ट्री उनके नाम पर कर दी जाए। कर्मचारियों ने कागजात की जांच की तो पता चला कि यह भूखंड 15 जुलाई 2010 में ही उनकी पत्नी के नाम पर हो चुका है। इस काम को कराने के लिए उनकी कथित पत्नी की ओर से नगर निगम द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र दाखिल किया गया था। अब्दुल रफीक की पत्नी बनकर अपने नाम रजिस्ट्री कराने वाली पीरजादा निवासी महिला ने दो अन्य गवाहों के भी प्रमाणपत्र दाखिल किए थे। कागजों में दर्शाया गया था कि अब्दुल रफीक की मृत्यु 21 अगस्त 1998 को पीरजादा स्थित उनके घर पर हुई थी। नगर निगम की ओर से 26 अगस्त 1998 को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया था। एसएसपी ने इस मामले की जांच सीओ सिविल लाइंस को सौंपी थी। सीओ ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पीड़ित के बयान दर्ज करने के बाद उसके दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। ये दस्तावेज नगर निगम और एमडीए से संबंधित हैं। दोनों विभागों को सीओ की ओर से पत्र जारी किए गए हैं। कागजातों के बारे में जानकारी मांगी गई है। दोनों विभागों से रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।