नए कानून से पीड़ित को मिलेगा त्वरित न्याय निर्दोष नहीं होंगे दंडित
डीआईजी मुनिराज जी ने बताया कि तीनों नए कानून को लेकर पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग दी गई है। नए कानूनों की मूल भावना तकनीक का अधिक से अधिक प्रयोग कर करना है, जिससे वादी को त्वरित न्याय मिलेगा और कोई भी निर्दोष व्यक्ति दंडित नहीं होगा।
राजस्व विभाग के अफसरों को दी ट्रेनिंग
संयुक्त निदेशक अभियोजन चंद्र प्रकाश मणि त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस कर्मी अधिकारियों के अलावा राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को तीनों नए कानूनों को लेकर ट्रेनिंग दी गई है। राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, कानून गोयन, तहसीलदार एडीएम को भी नए कानूनों को लेकर ट्रेनिंग दी गई है।
पुरानी धाराओं में ही होगी चार हजार केसों की सुनवाई
जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता ने बताया कि जनपद में 18 न्यायालयों में करीब चार हजार केस लंबित हैं। ये सभी केस आपराधिक मामलों के हैं। इन मामलों की सुनवाई जारी है। इन केसों पर नए कानूनों का कोई असर नहीं पड़ेगा।
इनकी सुनवाई पुरानी धाराओं में ही होगी। इनके अलावा जनपद के अलग-अलग थानों में 30 जून की रात 11 बजकर 59 मिनट तक दर्ज होने वाले केस भी पुरानी धाराओं के आधार पर ही सुने जाएंगे। इसके बाद दर्ज होने वाले केस नए कानूनों के हिसाब से सुने जाएंगे।
चाकू, तमंचा और नशीले पदार्थ की बरामदगी के दिखाने होंगे डिजिटल साक्ष्य
नए कानून में पुलिस को संवेदनशीलता दिखानी होगी। पुलिस आए दिन चाकू, तमंचा नशीले पदार्थ के साथ लोगों के साथ गिरफ्तार करती है। अगर अब पुलिस ऐसे मामलों में किसी को गिरफ्तार करेगी तो उसके डिजिटल साक्ष्य चार्जशीट में शामिल करने होंगे। अब इस इस तरह के मामलों में पुलिस कर्मियों पर झूठा फंसाने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अब डिजिटल साक्ष्य का नए कानून में बहुत महत्व होगा।
अब सभी विधिक प्रक्रिया तीन नए कानून के तहत होगी। नए कानून में धाराएं भी बदल गई हैं। आईपीसी में 511 धाराएं थी लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं होंगी। सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कहलाएगी। सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं। नए कानून में अब इसमें 531 धाराएं होंगी। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के नाम से जाना जाएगा। इनमें डिजिटल साक्ष्यों का महत्व बढ़ाया गया है। - चंद्र प्रकाश मणि त्रिपाठी संयुक्त निदेशक, अभियोजन
नए कानून को लेकर पुलिस कर्मियों को ट्रेनिंग दी गई है। खासतौर पर मुंशियों को निर्देश दिए गए हैं कि धाराएं दर्ज करने से पहले उन्हें समझ लें और अपने सीनियर से चर्चा कर लें। इसके बाद ही केस दर्ज करें। विवेचकों को भी निर्देशित किया गया कि वह संवेदनशीलता दिखाएं। इसके अलावा धाराओं को लेकर लोगों को जागरूक करें। - सतपाल अंतिल, एसएसपी