सीएए के विरोध में हुई हिंसा के आरोपियों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए वसूली गई धनराशि की वापसी शुरू हो गई है। तहसीलदार ने मुस्लिम कमेटी के पदाधिकारियों के बीच कागजी कार्रवाई पूरी कराते हुए 4.27 लाख रुपये से अधिक की धनराशि वापस कराई।
सीएए के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को शहर में बवाल हो गया था। तीन दिन तक अमरोहा शहर हिंसा की आग में सुलगता रहा था। अलग-अलग ठिकानों पर विरोध प्रदर्शन के बीच कुछ हिंसक घटनाएं भी हुई थीं। पथराव की घटनाओं में कुछ पुलिस कर्मी भी घायल हुए थे, जबकि सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान के उदाहरण भी सामने आए थे। एलआईयू इंस्पेक्टर और एक पत्रकार की बाइक आग के हवाले किए जाने की घटना भी सामने आई थी।
पूरे प्रकरण में पांच एफआईआर दर्ज हुई थीं। इनमें कई नामजद और अज्ञात समेत करीब 2602 लोगों को आरोपी बनाया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने 161 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किए थे। साथ ही प्रशासन ने सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के आधार पर कई आरोपियों को इसकी भरपाई के लिए वसूली के नोटिस जारी किए थे।
प्रशासन की ओर से नुकसान की भरपाई की राशि, जुर्माने के भुगतान के लिए दबाव बढ़ने पर सपा विधायक महबूब अली ने मुस्लिम कमेटी के माध्यम से 4,16, 439 रुपये जमा कराए थे। इसके अलावा कुछ अन्य आरोपियों से भी जुर्माना वसूला गया था।
इस प्रक्रिया को शहर के मोहल्ला कुरैशी निवासी अधिवक्ता परवेज आरिफ टीटू ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को वसूली के नोटिस और वसूली गई धनराशि वापस करने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में बुधवार को तहसीलदार भूपेंद्र सिंह ने मुस्लिम कमेटी पदाधिकारियों को बुलाकर 4,16, 439 रुपये वापस किए। वहीं दो अन्य लोगों द्वारा जमा कराए गए 5500-5500 रुपये भी वापस किए गए। इस तरह बुधवार को कुल 4,27,439 रुपये की वापसी की गई। तीन लोगों के 15 हजार रुपये की वापसी अभी बाकी है। इससे पहले प्रशासन ने 78 नोटिस वापस किए थे।
इस दौरान मुस्लिम कमेटी के अध्यक्ष नसीम अहमद खां, हाजी खुर्शीद अनवर, हाजी अब्दुल कय्यूम रायनी, डॉ.नजमुन्नबी, मंसूर अहमद एडवोकेट, हबीब अहमद, यासिर अंसारी, निराले मियां अंसारी, अमजद इदरीसी आदि मौजूद रहे।