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कई जगह अवैध निर्माण, कैसे स्मार्ट बनेगा शहर

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काशीपुर रोड जामा मस्जिद पुल से आगे बसाई गई अवैध बस्तियां
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मुरादाबाद। सिक्योरिटी और कनेक्टिविटी की कमी ने विकास के मामले में काशीपुर रोड को उपेक्षित कर डाला है। एमडीए, जिसके कंधों पर शहर के सुव्यवस्थित विकास का दारोमदार है उसने कभी इस इलाके के विकास में दिलचस्पी नहीं दिखाई। नगर निगम भी पहले से विकसित कांठ रोड को ही चमकाकर शहर को स्मार्ट सिटी का तमगा पहनाने की कवायद में जुटा है। जबिक सही मायने में शहर के जिन उपेक्षित इलाकों को विकास की दरकार है उनसे नजरें फेर रखी हैं।
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एमडीए अफसरों की अनदेखी और इंजीनियरों की शह की वजह से संभल, और रामपुर रोड की तर्ज पर काशीपुर रोड पर भी अवैध बस्तियां बस गई हैं।। काशीपुर रोड को नैनीताल हाईवे के रूप में भी देखा जाता है। यदि एमडीए ने ध्यान दिया होता तो शहर के इस हिस्से को रामनगर की तर्ज पर विकसित किया जा सकता था। यह रोड सीधा रामनगर को जाता है। रामनगर जाने के लिए दिल्ली और दूसरे राज्यों से आने वाले तमाम टूरिस्ट इसी रूट का इस्तेमाल करते हैं। सुव्यवस्थित विकास के जरिए शहर के इस हिस्से और आधुनिक और आकर्षक बनाया जा सकता था। लेकिन एमडीए की उपेक्षा की वजह से इस इलाके में भी धड़ल्ले से होते जा रहे अवैध निर्माणों ने पूरे इलाके की सूरत बिगाड़कर रख दी है। इस इलाके को सलीके से विकसित करने के लिए सिक्योरिटी और शहर से सीधे कनेक्टिविटी की दरकार थी। लेकिन एमडीए और निगम ने इस पर कोई काम नहीं किया।
रामगंगा, वंडरलैंड और जामा मस्जिद पुल के चौड़ीकरण की दरकार
मुरादाबाद। काशीपुर रोड को शहर से सीधा कनेक्ट करने के लिए जामा मस्जिद पुल है जो पर्याप्त चौड़ा नहीं होने के साथ ही घनी आबादी में आकर उतरता है। दूसरा कटघर रामगंगा पुल है जो अपनी मियाद पूरा कर चुकने के साथ ही शहर की आबादी के हिसाब से पहले ही काफी संकरा है। यहां पुराने पुल के बगल में नया पुल बनाने की मांग अर्से से उठ रही है। इसके अलावा प्रेम वंडर लैंड क्त्रससिंग पर बना पुल इतना संकरा है कि उस पर अक्सर जाम के हालात रहते हैं। जब यह पुल बना था तभी इसके फोर लेन बनाने की मांग उठी थी। कुल मिलाकर शहर का काशीपुर रोड का हिस्सा शहर से कनेक्क्टिविटी के मामले मे उपेक्षा का शिकार है। शहर के इस हिस्से की आबादी को शहर आने के लिए जाम से जूझना पड़ता है। जामा मस्जिद पुल भी इतना चौड़ा नहीं है कि इसके भरोसे काशीपुर रोड को विस्तार दिया जा सके। कनेक्टिविटी के लिए जरूरी है कि जामा मस्जिद पुल और कटघर रामगंगा पुल व प्रेम वंडरलैंड क्त्रससिंग पर बने पुल का चौड़ीकरण किया जाए। सिक्योरिटी के लिए पीएसी की एक बटालियन को कांठ रोड से हटाकर यहां काशीपुर रोड पर शिफ्ट किए जाने की बातें भी करीब छह साल पहले चली थीं लेकिन उन पर अमल न हो सका। तीन पुलों के चौड़ीकरण और पीएसी की एक बटालियन आने से यह इलाका कनेक्टिविटी और सिक्योरिटी के पौमने पर पूरा हो जाता।
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रामनगर की तर्ज पर विकसित होने थे रिसोर्ट
मुरादाबाद। काशीपुर रोड से हर रोज हजारों की टूरिस्ट रामनगर व नैनीताल को जाते हैं। यदि एमडीए की सीमा के भीतर इस रोड पर प्राधिकरण ने रिसॉर्ट्स और होटल्स के लिए भूखंड सृजित कर दिए तो यह इलाका टूरिस्ट हाल्ट भी बन सकता है। रोड साइड बड़े बड़े फूड कोर्ट यहां टूरिस्ट को ठहरने के लिए रिझा सकते हैं। लेकिन फिलहाल तो यह इलाका एमडीए की उपेक्षा की वजह से अवैध निर्माणों की भेंट चढ़ता जा रहा है।
इन इलाकों में नहीं रुक रहा अवैध निर्माण
मुरादाबाद। काशीपुर रोड पर जामा मस्जिद पुल से उतरते ही सड़क के दोनों साइड खेतों में अवैध रूप से प्लाटिंग करके छोटी छोटी बस्तियां बसा दी गई हैं। यह सिलसिला रेलवे क्रॉसिंग पार करके आगे रामपुर दोराहे तक जारी है। सड़क के आसपास एमडीए की सीमा में खेतों में छोटी छोटी 20 से अधिक अवैध बस्तियां बसी हैं। गोट गांव और बरवाला मझरा और इसके आसपास के इलाके में खेतों में तेजी से अवैध निर्माण चल रहे हैं। चक बेगमपुर तक एमडीए की सीमा है और यहां तक अवैध निर्माणों और खेतों में प्लाटिंग का सिलसिला जारी है।
अकेले कांठ रोड को चमकाने से स्मार्ट नहीं बनेगा शहर
मुरादाबाद। नगर निगम स्मार्ट सिटी के तहत मिली रकम के बड़े हिस्से को कांठ रोड पर ही लगाने जा रहा है जहां पहले से ही सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह इलाका सिविल लाइंस से सीधे जुड़ा है इसलिए इसे सिविल लाइंस एक्सटेंशन भी कहते हैं। यहां मधुबनी, आशियाना, रामगंगा विहार, अवन्तिका समेत 90 फीसदी बसावट खुद एमडीए की बसाई हुई है लिहाजा यहां सड़कें, पार्क आदि सब कुछ है। व्यवस्थित विकास के मामले में यह इलाका शहर में शीर्ष पर है। पीएसी की तीन बटालियन, पुलिस अकादमी,पीटीएस, पुलिस लाइन और तमाम आला अधिकारियों के आवास होने की वजह से सुरक्षा के मामले भी शहर का यह हिस्सा सबसे सुरक्षित माना जाता है। अकेला कांठ रोड ही है जिसे शहर से जुड़ने के लिए किसी पुल की दरकार नहीं है। इसलिए यहां कनेटिविटी की भी दरकार नहीं है। बावजूद इसके विकास के मामले में नगर निगम और दूसरी संस्थाओं के फोकस हमेशा शहर का यही हिस्सा रहा है। शहर के पिछड़े इलाकों की दशा सुधारने पर ध्यान देने बजाए नगर निगम भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी कांठ रोड को ही तरजीह दे रहा है। जबकि शहर को सही मायने में स्मार्ट बनाने के लिए जरूरी है कि शहर का चौतरफा विकास हो।
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