मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर स्ट्रेचर नहीं मिलने पर मरीज को ठेले पर ले जाता कुली। रेलवे का कहना है क?
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मुरादाबाद। कैंसर से पीड़ित मरीज को मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से संभल के लहरा कमंडल गांव तक ले जाने से एंबुलेंस चालक ने इनकार कर दिया। यही नहीं बीकानेर (राजस्थान) से दवा लेकर लौटे कैंसर पीड़ित को स्टेशन पर स्ट्रेचर भी नहीं मिला। हालात से टूटे मरीज और तीमारदारों के लिए सहारा बने प्रमोद कुमार, जो रेलवे कुली की भूमिका में काम करते हैं। प्रमोद ने सामान ढोने वाले ठेले पर लिटाकर कैंसर पीड़ित को ऑटो तक पहुंचाया। ऑटो से टैक्सी स्टैंड लाने के बाद परिजन उन्हें टैक्सी बुक करके गांव तक ले जा सके।
कैंसर से पीड़ित श्याम कुमार संभल के लहरा कमंडल गांव के रहने वाले हैं। श्याम कुमार के मामा महेंद्र कुमार ने बताया कि कैंसर की चपेट में आने के बाद परिवार के लोग कुछ माह पहले इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले गए थे। वहां डॉक्टरों के इनकार के बाद राजस्थान में बीकानेर ले गए। वहां से उनका इलाज चल रहा है। इलाज के लिए हर महीने बीकानेर जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बीकानेर से दवा लेकर ही वह गुरुवार को लौटे थे। दिल्ली से अवध एक्सप्रेस से सुबह करीब 11 बजे मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। मुरादाबाद से गांव तक जाने के लिए 108 नंबर फोन पर उपलब्ध होने वाली एंबुलेंस सेवा के लिए रिंग किया। एंबुलेंस चालक ने कैंसर मरीज को गांव तक ले जाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद टैक्सी से उन्हें ले जाने का इरादा बनाया लेकिन स्टेशन के प्लेटफॉर्म से बाहर तक लाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। मरीज की पत्नी रश्मि ने बताया कि उनकी परेशानी देख कर प्रमोद कुमार नामक कुली ने सामान ले जाने वाला ठेला आगे कर दिया। मरीज के साथ मौजूद गद्दा-तकिया ठेले पर बिस्तर की तरह लगाया और प्लेटफॉर्म से लेकर ऑटो तक बिना कोई पैसा लिए पहुंचाया। बाद में टैक्सी से गांव तक का सफर पूरा किया।
इस घटनाक्रम के गवाह बने लोग जहां प्रमोद कुमार की भूमिका की सराहना करते रहे, वहीं सरकारी एंबुलेंस सेवा और रेलवे के सिस्टम पर सवाल उठाते रहे। वहीं, स्टेशन अधीक्षक अवध अस्थाना का कहना है कि स्टेशन पर पहियों वाला स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होता है। उठाकर ले जाने वाला स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध रहती है लेकिन उनसे किसी ने इसकी मांग नहीं की। कुली ने भी उन्हें या अन्य स्टाफ को सूचना न देकर खुद सेवक की भूमिका निभा दी।
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