मुरादाबाद। सुना है सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं। तमाम संस्थाएं भी मेरी जैसी लाचार बेटियों की मदद का दावा करती हैं। काश कोई संस्था मेरा भी दर्द महसूस करे। यह लफ्ज उस लाचार अर्चना के हैं जिसे उसके ही भाइयों ने सरिये और डंडों से पीटकर मरणासन्न छोड़ दिया था। जिंदगी के लिए संघर्ष का रही अर्चना शुक्रवार को अदालत में बयान देने पहुंची। उसके ससुराल वाले उसे स्ट्रेचर पर लेटाकर अदालत लेकर आए। बदालत में बयान देने से पूर्व अर्चना ने अमर उजाला से बातचीत की।
अर्चना ने कहा कि मेरा कसूर बस इतना था कि मैंने परिवार के विरोध में जाकर प्रेम विवाह किया। जिस तरह मेरे भाइयों ने मेरी पिटाई की थी, मैं तो जिंदगी की आस ही छोड़ चुकी थी। मेरे पति और ससुराल वालों ने अपनी जमापूंजी लगाकर मेरी जिंदगी तो बचा ली, लेकिन मैं अपनों पैरों पर खड़ी नहीं हो सकती। हार कर ससुराल वाले भी मुझे अस्पताल से घर ले गए। मेरे पैरों का आपरेशन हो तो शायद मैं फिर से चल सकूं। मैं भी अन्य बेटियों के जैसे उड़ान भर सकूं।
पिछली तिथि पर अर्चना ने आरोपी भाइयों के खिलाफ अपने बयान दर्ज कराए थे। जिसमें बताया था कि किस तरह से आरोपी भाइयों ने उसके साथ जालिमों जैसा बर्ताव किया था और बार-बार गिड़गिड़ाने के बाद भी उसे नहीं छोड़ा था। इस घटना में अर्चना के दोनों पैरों की हड्डियां कई जगह से टूट गईं। बकौल अर्चना उसने गनेश घाट निवासी सुनील कुमार से प्रेम विवाह किया था। जिससे उसके घर वाले नाराज थे। इस कारण से दोनों विवाह करने के बाद काशीपुर चले गए थे। कुछ समय बाद वापस आ कर गांव में रहने लगे, लेकिन अर्चना के घर वालों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था।
19 जुलाई को अर्चना के भाई प्रदीप, संजय, राजकुमार व सोनू ने घर में घुस कर उसकी पिटाई करते हुए सरियों व डंडो से उसके पैरों पर हमला किया था। इस मामले की सुनवाई अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट पंचम दानवीर सिंह की अदालत में की जा रही है। सहायक अभियोजन अधिकारी शैलेश शेखर व पवन कुमार पांडे ने बताया कि शुक्रवार को अदालत ने आरोपी प्रदीप, संजय, राजकुमार व सोनू को जेल से तलब किया। पीड़िता से आरोपियों के वकील ने जिरह पूरी की। अदालत ने शेष गवाही के लिए आगामी तारीख 18 नवंबर लगा दी है।