मुरादाबाद। प्रशासक का कार्यकाल खत्म होने के बावजूद प्रधन को बिना बताए ग्राम पंचायत के खाते से 3.46 लाख की रकम निकालने के मामले में शासन ने मूंढापांडे के एडीओ पंचायत को निलंबित कर दिया है। शासन की इस कार्रवाई से आरोपों से घिरे अन्य सहायक विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों में खलबली मची है। अमर उजाला द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है।
मूंढापांडे ब्लॉक के दौलरा में पंचायत का गठन 27 मई को हो गया था, लेकिन बाद ग्राम पंचायत के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार ग्राम पंचायत में निहित हो गए थे लेकिन इसके बावजूद उनकी ग्राम पंचायत से 3 लाख 46 हजार 875 रुपये निकाले गए। इसकी कोई जानकारी ग्राम प्रधान को भी नहीं दी गई। अमर उजाला से इसका खुलासा किया। ग्राम प्राधन की शिकायत पर डीएम ने मामले की जांच कराई।
तत्कालीन एडीओ पंचायत चंद्रपाल सिंह और तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव दयाराम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं होने पर पंचायत सचिव को जिला विकास अधिकारी ने पूर्व में ही निलंबित कर दिया था और एडीओ पंचायत के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उप निदेशक पंचायती राज ने रिपोर्ट निदेशक पंचायती राज विभाग लखनऊ को भेजी थी।
इस रिपोर्ट के आधार पर निदेशक पंचायती राज ने आरोपी सहायक विकास अधिकारी पंचायत चंद्रपाल सिंह को वित्तीय अनियमितता, शासनादेशों के विरुद्व कार्य करने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है। उन्हें डीपीआरओ कार्यालय से समबद्व किया गया है।
निष्पक्ष जांच हुई तो कई ओरों पर भी गिर सकती है गाजपांच माह के प्रशसक कार्यकाल में विकास के नाम पर निकाले गए हैं 38 करोड़
अमर उजाल ब्यूरोमुरादाबाद। जिले में पंचायत चुनाव के कारण पूर्व में निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो जाने पर 25 दिसंबर 2020 से ग्राम पंचायत की बागडोर ग्राम पंचायत सचिव और एडीओ पंचायत के हाथों में आ गई थी। जिसके बाद प्रशासक की हैसियत से इन लोगों द्वारा करीब 5 माह के कार्यकाल के दौरान जिले में 38 करोड़ रुपए विकास के नाम पर खर्च किए गए । इस दौरान प्रशासकों द्वारा आनन-फानन खर्च की गई इस धनराशि में काफी अनियमितता के भी आरोप लगे।
यही नहीं 27 मई 2021 को प्रशासकों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी प्रशासकों ने विकास के नाम पर अनियमित ढंग से कई ग्राम पंचायतों में लाखों के भुगतान निकाले। प्रधानों को बाद में इसका पता चला। पंचायत राज विभाग में चल रहे इस गोलमाल को अमर उजाला द्वारा प्रमुखता से उजागकर किया है जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और अब जांच के बाद इनमें कार्रवाई भी शुरू हो गई है। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कई ओरों पर भी गाज गिर सकती है।