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पंचमी पर स्कंद माता स्वरुप का किया दर्शन

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विंध्याचल। चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि पर बुधवार को भक्तों ने मां स्कंदमाता के स्वरूप का दर्शन किया। विंध्यधाम में भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
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पंचमी तिथि पर संपूर्ण विंध्य नगरी शक्ति की आराधना में पूरी तरह तल्लीन नजर आई। पूरे दिन आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी की जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। देश के कोने कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन पूजन करने के लिए पहुंचे। चिलचिलाती धूप की परवाह किए बगैर आस्थावान घंटों कतार में खड़े रहे। घंटो मशक्कत के बाद मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन श्रद्धालु निहाल हो उठे। क्या छोटे और क्या बड़े सभी मां की भक्ति में तल्लीन नजर आए। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद चैत्र नवरात्र पर दर्शन पूजन के लिए विंध्याचल मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन करने के बाद श्रद्धालुओं ने अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां काली और मां अष्टभुजी देवी के धाम में पहुंचकर दर्शन पूजन किया।
गड़बड़ाधाम में 30 हजार भक्तों ने टेका मत्था
हलिया।चैत्र नवरात्र के पंचमी पर गड़बड़ाधाम स्थित शीतला मंदिर में 30 हजार से अधिक भक्तों ने शीश नवाया। बुधवार की भोर मंगला आरती के बाद शुरु हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला पूरे दिन तक चलता रहा। जवारी लिए दर्शन को आई कुंआरी कन्याएं आकर्षण की केंद्र रहीं। माता के दरबार में दर्शन पूजन के साथ ही बच्चों के मुंडन संस्कार भी जारी रहा। मंदिर परिसर में कई श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती पाठ में तल्लिन रहे। दर्शन पूजन में किसी प्रकार का व्यवधान न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन की ओर से पुरुष और महिलाओं की अलग-अलग कतारें लगवाई गयीं थी।
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घर की लालसा में श्रद्धालु पर्वत पर बना रहे घरौंदा
विंध्याचल। विंध्य त्रिकोण मार्ग पर दर्शन-पूजन को आए श्रद्धालु रोजाना पत्थरों से घरौंदे बना रहे हैं। मान्यता है कि त्रिकोण परिक्रमा मार्ग पर अष्टभुजा पहाड़ पर घर की लालसा में बनाए गए घरौंदा से भक्तों की घर बनाने की लालसा एक ना एक दिन देवी जरुर पूरी करती हैं
कालीखोह से अष्टभुजा मंदिर तक सड़क के दोनों तरफ पत्थरों के बने घरौंदे देखे जाते हैं। श्रद्धालुआें द्वारा पत्थरों के टुकड़ों को सजाकर सपनों का घर बनाया जाता है। रायबरेली से दर्शन पूजन करने आए नितिन कुमार पटेल ने बुधवार को जब सबको पहाड़ पर पत्थर से घरौंदा बनाते देखा तो वे इस मान्यता के बारे में जिज्ञासा से भर उठे। उनके पूरे परिवार ने मिलकर घरौंदा बनाया। उन्नाव की प्रेमा देवी सासाराम के राम सागर और प्रमिला देवी ने भी पहाड़ पर पत्थरों से घरौंदा बनाया। कुछ का कहना था कि हम लोगों ने इस मान्यता को आजमाया है। इसका असर होता है। खाने का ठिकाना नहीं था लेकिन माता की कृपा से खुद की मेहनत की कमाई से आशियाना बन गया।
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