मिर्जापुर। ग्रामीण क्षेत्र में सीएचसी पर आने वाले गंंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े इसके लिए टेली मेडिसीन सेवा की शुरुआत हुई थी। इसका लाभ मरीजों को मिल रहा था। अपोलो अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों को टेली मेडिसीन सेवा के माध्यम से वीडियो कॉलिंग के माध्यम से इलाज करते थे। ये सुविधा जिले में बीते 10 महीने से ठप पड़ी है। इस कारण प्रतिदिन 70 से 80 मरीजों को अब इलाज कराने के लिए निजी अस्पताल में जाना पड़ता है।
सीएचसी से लेकर मंडलीय अस्पताल तक मरीजों का उपचार करने के लिए डॉक्टर हैं पर कई गंभीर रोगों के इलाज के लिए विशेषज्ञ की जिले के अस्पतालों में कमी है। मंडलीय अस्पताल के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद भी कार्डियोलाजिस्ट, न्यूरोलाजिस्ट, गैस्ट्रोलाजिस्ट के डाक्टर की कमी है। ऐसे में जिले के लोगों को बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपोलो अस्पताल के साथ अनुबंध करके टेली मेडिसीन सेवा की शुरुआत की थी। इसमें वीडियो कॉलिंग के माध्यम से अपोल अस्पताल के डॉक्टर मरीजों से बात करके जांच कराकर रिपोर्ट के आधार पर उनके गंभीर रोगों का इलाज करते थे।
20 गंभीर बीमारियों का होता था इलाज
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के आठ प्रमुख सीएचसी लालगंज, मड़िहान, राजगढ़, कछवां, विंध्याचल, चुनार, अहरौरा और जमालपुर में टेली मेडिसीन सेवा की शुरूआत की थी। सभी स्थानों पर टेली मेडिसीन के जरिये प्रतिदिन 10 मरीजों को इसका लाभ मिलता था। मेडिसिन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, गुर्दा रोग विशेषज्ञ, ह्रदय रोग, स्त्री रोग विशेषज्ञ हार्ट रोग विशेषज्ञ सहित बीस गंभीर रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक इलाज करते थे। अब टेली मेडिसीन कक्ष में ताला लटका है। आठ में सिर्फ विंध्याचल सीएचसी पर फिलहाल बीएचयू के डॉक्टर टेली मेडिसीन सेवा के माध्यम से मरीजों का इलाज करते हैं।
ई-संजीवनी पर लटकता रहता है ताला, तैनाती के बाद भी नहीं आ रहे डाक्टर
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मिर्जापुर। लोगों को घर बैठे उपचार की सुविधा मिले इसके लिए मंडलीय अस्पताल में ई-संजीवनी कक्ष बनाया गया है। जहां डॉक्टर बैठकर ऑनलाइन मरीजों की समस्या सुनते हैं। इसमें तीन डॉक्टर की तैनाती होने के बाद भी वहां ताला लटका रहता है। इस कारण लोगों को सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है। कोरोना संक्रमण काल में मरीजों को भीड़ से बचाने के लिए सरकार ने ई-संजीवनी ओपीडी सेवा की शुुरूआत की। मंडलीय अस्पताल में इसका हब बनाया गया। योजना के तहत प्रदेश के डॉक्टरों को जोड़ा गया है। मंडलीय अस्पताल में बने ई-संजीवनी कक्ष में एक स्पेशलिस्ट समेत चार डॉक्टर का पद था। वर्तमान में तीन डॉक्टर की नियुक्त है। इसमें एक छुट्टी पर हैं। दो डॉक्टर है।
केस 1
लालगंज के नदगहना निवासी 60 वर्षीय दास ने बताया कि टेलीमेडिसिन से फायदा था। यहां बड़े अस्पताल के डॉक्टरों से इलाज मिलता था। लगभग एक एक साल से बंद है। इलाज करवाने में बहुत दिक्कत हो रही है।
केस 2
लालगंज के बल्हिया निवासी झगड़ ने बताया कि वीडियो कॉलिंग के जरिये बड़े अस्पताल के डॉक्टर दवा और पूरी जांच की बात बताते थे। वह सुविधा बंद होने के बाद अब बाहर जाना पड़ रहा है।
केस 3
राजगढ़ क्षेत्र के सेमरा बरहों रत्ती देवी (80) ने चर्म रोग विशेषज्ञ से इलाज कराया था। एक महीने दवा करने के बाद वह ठीक हो गईं।
केस 4
राजगढ़ की रमाकांति देवी (83) ने बताया कि घुटने में दर्द था। हड्डी के विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज कराया। टेली मेडिसिन विभाग बंद होने से इलाज अधूरा रह गया।
शासन स्तर से बंद है टेली मेडिसीन का टेंडर
राजगढ़ सीएचसी प्रभारी डॉ. पवन कुमार कश्यप ने बताया कि शासन स्तर पर टेंडर न होने से टेली मेडिसीन सेवा बंद है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
चुनार में प्रतिदिन 20 मरीजों को मिलता था परामर्श
चुनार। चेचरी मोड़ सीएचसी पर भी लगभग 10 महीने से टेली मेडिसिन सेवा बंद है। केंद्र अधीक्षक डॉ. जमील अनवर ने बताया कि टेली मेडिसिन सेवा का प्रतिदिन लगभग 20 से 22 मरीज केंद्र पर चिकित्सकीय परामर्श लेने आते थे।
तीन डॉक्टर की तैनाती है। एक डॉक्टर छुट्टी पर हैं। ई-संजीवनी कक्ष में बैठकर डॉक्टर परामर्श देते हैं। अगर ई-संजीवनी कक्ष में ड्यूटी के समय ताला बंद रहने की बात है तो जांच की जाएगी। यदि शिकायत सही पाई गई तो कार्रवाई करेंगे।
डा. एसके श्रीवास्तव, सीमएस, मंडलीय अस्पताल
आठ सीएचसी में टेली मेडिसीन की सुविधा शुरू हुई थी। इसमें अपोलो अस्पताल के डॉक्टर सलाह देते थे। सात स्थानों पर अनुबंध समाप्त हो गया है। विंध्याचल सीएचसी में मरीजों को बीएचयू के डॉक्टर से टेली मेडिसीन के जरिए उपचार मिलता है।
डॉ. मुकेश कुमार, एसीएमओ