फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिर्फ बर्न वार्ड में होता है झुलसे लोगों का इलाज

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के मंडलीय अस्पताल में आग से झुलसकर पहुंचे मरीजों का उपचार हो जाए, यही बड़ी बात है, उनकी प्लास्टिक सर्जरी होना तो दूर की कौड़ी है। मंडलीय अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी के लिए न तो बर्न यूनिट है और न ही प्लास्टिक सर्जरी के लिए सर्जन की तैनाती है। ऐसे में जिले में फिलहाल जलकर झुलसे लोगों की प्लास्टिक सर्जरी का सपना अधूरा ही है।
विज्ञापन

मंडलीय अस्पताल में दो-दो कमरों में 12-12 बेड के महिला और पुरुष बर्न वार्ड हैं। ये वार्ड काफी समय से संचालित हो रहे हैं। जहां आग से झुलस कर पहुंचे मरीजों का उपचार होता है। हल्का जले लोगों का तो उपचार हो जाता है, परंतु अत्यधिक गंभीर मरीज को रेफर ही करना पड़ता है। जले हुए अन्य मरीजों को भी तब समस्या का सामना करना पड़ता है, जब वार्ड में लगी एसी खराब हो जाती है। वार्ड में झुलसकर पहुंचे मरीजों के लिए एसी बहुत जरूरी है, परंतु बर्न वार्ड में सबसे बड़ी समस्या एसी की ही है। पहले विंडो एसी थी, जो अक्सर खराब रहती थी, अब स्प्लिट एसी लगा है। ये भी अक्सर खराब रहता है। एसी तो चलता है, पर कुलिंग नहीं होती है। फिलहाल एसी सही चल रही है। इसके अलावा मंडलीय अस्पताल के बर्न वार्ड में मरीजों के लिए अन्य कोई सुविधा नहीं है। मंडलीय अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन तो आ गया है, परंतु बर्न वार्ड में अन्य सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं। मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. आलोक का कहना है कि अस्पताल में 12-12 बेड के महिला और पुरुष अलग-अलग बर्न वार्ड हैं। वार्ड में एसी लगा है। दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। प्लास्टिक सर्जन की नियुक्ति नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें