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विज्ञान व कला संकाय के आधा दर्जन से अधिक पद रिक्त

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राजकीय पीजी कॉलेज में ऑनलाइन स्थानांतरण होने के बाद शिक्षकों के आधा दर्जन से अधिक पद रिक्त हो गए हैं। जिसके कारण एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के सामने पठन-पाठन का संकट गहरा गया है। वही विज्ञान संकाय के जूलॉजी, बॉटनी, गणित ,भौतिक विज्ञान और कला संकाय के भूगोल व अंग्रेजी के पद स्थानांतरण से रिक्त होने से कालेज की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है।
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श्रीमती इंदिरा गांधी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सात प्राध्यापकों का पद ऑनलाइन स्थानांतरण के चलते रिक्त हो चुका है। यह कॉलेज अपने स्थापना काल से ही उपेक्षा का दंश झेल रहा है। यह कॉलेज क्षेत्र की छात्राओं के लिए यह किसी विश्वविद्यालय से कम नहीं है क्योंकि छात्र तो प्रयागराज अथवा वाराणसी जाकर पढ़ लेते हैं। लेकिन छात्राओं की इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करना टेढ़ी खीर बना हुआ था। इसलिए यह कॉलेज उनके सपनों को आकार देने वाला एकमात्र विज्ञान का कॉलेज है। लेकिन प्राध्यापकों का ऑनलाइन ट्रांसफर जिस तरीके से किया गया है, उससे विज्ञान संकाय के सभी पद रिक्त हो गए हैं। जिसका खामियाजा यहां के छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ेगा। वर्ष 2020 में क्षेत्रीय विधायक राहुल प्रकाश कोल ने कॉलेज की दुर्दशा को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री से मिलकर प्राध्यापकों की नियुक्ति किए जाने के लिए पत्र सौंपा था। मुख्यमंत्री ने विधायक के प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से रिक्त पड़े पदों पर स्थानांतरण करके प्राध्यापकों की कमी को दूर किया था। ऐसे प्राध्यापक मौका पाते ही ऑनलाइन स्थानांतरण कराकर चलते बने। खास बात तो यह है कि शहर से सटे कालेजों में प्राध्यापकों की भरमार है। जिसमें नैनी हेमवती नंदन बहुगुणा कॉलेज, औराई पीजी कॉलेज, बनारस राजकीय पीजी कॉलेज जैसे कालेजों में प्राध्यापकों की कोई कमी नहीं है लेकिन इस स्थल पर जहां शिक्षा का एकमात्र विकल्प राजकीय पीजी कालेज है। वहां के प्राध्यापकों का स्थानांतरण होने से अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है।
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