जांच टीम में एसओजी व सर्विलांस टीम को भी शामिल किया गया। टीम ने जहां शिकायतकर्ता द्वारा कैश का कलेक्शन किया गया था, वहां से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ की। साथ ही जिस रूट से प्रवीण घटनास्थल तक पहुचां था, उस रूट के सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया। जिससे स्पष्ट हुआ कि जिस स्थान पर प्रवीण द्वारा घटना होना बताया जा रहा है, उस रूट पर प्रवीण के आसपास एक घंटे तक कोई वाहन सवार नहीं दिखा। वह सुनसान रोड है, जहां रात में बहुत कम आवागमन होता है।
जांच से ये पाया गया कि घटना से करीब आधा घंटा पहले प्रवीण द्वारा अपना व अपने साथी के मोबाइल फोन को स्वीच ऑफ कर लिया गया था। गोपनीय सूत्रों से पता चला कि प्रवीण पर पर काफी कर्ज था। तथ्यों के आधार पर जब प्रवीण से पूछताछ की गई तो वह टूट गया और उसने बताया कि वह करीब तीन वर्ष से माइक्रो फाइनेंस कंपनी का कैश कलेक्शन कर बैंकों में जमा करता है। उस पर करीब सात लाख रुपये कर्ज है। साथ ही करीब ढाई लाख रुपये प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के कर्मचारीयों द्वारा उसका रोक लिया गया था।
प्रवीण ने बताया कि उसको हर महीने करीब 30 हजार रुपये का ब्याज भी भरना पड़ रहा है। यहा वजह है कि उसने झूठी साजिश रची। प्रवीण 16 लाख 73 हजार रुपये कैश अपने कब्जे से बरामद कराया।