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जिले में नेत्र बैंक का अभाव, नहीं चला नेत्र दान अभियान

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नेत्र दान करने से उस नेत्र से किसी और इंसान की आंखों को रोशनी मिल जाती है, इसीलिए नेत्र दान अभियान भी चलाया जाता है। परंतु जिले में न तो नेत्र बैंक है और न ही नेत्र दान अभियान चलाया गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि जिले में मेडिकल कॉलेज बन जाने पर नेत्र बैंक की सुविधा भी मिल सकती है। उधर, स्वास्थ्य विभाग नेत्रदान के लिए अभियान भी चलाने की बात कह रहा है।
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आंखों से देखकर इंसान अपना काम आसानी से कर पाता है। बिन आंख के कार्य कर पाना मुश्किल होता है। कई लोग जन्मजात नेत्रहीन होते हैं तो कुछ हादसे का शिकार होकर अपना नेत्र गंवा बैठते हैं। ऐसे लोगों के लिए दूसरों की तरफ से दान की हुई आंखें रोशनी प्रदान करती हैं। इसके लिए नेत्र दान अभियान चलाया जाता है। जिसमें लोग स्वेच्छा से अपनी मृत्यु के बाद नेत्रदान करने की अनुमति देते हैं। नेत्र दान करने के कुछ समय के अंदर ही उसे नेत्र बैंक में रखना होता है, परंतु जिले में नेत्र बैंक नहीं है। इस कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से हाल के वर्षों में नेत्र दान के लिए कोई अभियान ही नहीं चलाया गया है। बाहरी सामाजिक संस्थाओं ने पूर्व के वर्षों में अभियान चलाकर लोगों का रजिस्ट्रेशन कराया है, परंतु स्वास्थ्य विभाग के पास कोई डाटा नहीं है।
सीएमओ डॉ.राजीव सिंघल का कहना है कि जिले में नेत्र बैंक नहीं है। हाल के वर्षों में नेत्रदान के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई अभियान नहीं चलाया गया है। नेत्रदान के लिए अभियान चलाया जाएगा। लोगों से नेत्रदान के लिए फार्म भरवाए जाएंगे।
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