मिर्जापुर। नगर में कूड़े को निस्तारित करने के लिए जला दिया जा रहा है। इससे एक तरफ से समस्या कम हो रही तो दूसरी ओर वायु प्रदूषण बढ़ रहा। समस्या इस बात की है कि नगर पालिका तो सफाई कराती है लेकिन कतिपय कर्मचारी उसके कार्यों पर पानी फेर दे रहे हैं। सुबह के समय कूड़े की गाड़ी का लोड अधिक न हो, इस वजह से कूड़ा गाड़ी में ही कूड़ों को जला दे रहे हैं। इससे उस पूरे क्षेत्र में जहां से वाहन गुजरता है, धुआं-धुआं हो जाता है। आम जनता को तो इससे परेशानी नहीं होती लेकिन महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों को काफी परेशानी होती है। सांस के रोगियों को काफी परेशानी हो रही है। इस पर अंकुश लगाए जाने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही कई जगहों पर कूड़े के ढेर में भी आग लगाई जा रही है। जो समस्या को और बढ़ा रही है। इस समय कोविड का खतरा है। इसमें मुख्य रूप से सांस व फेफड़े की ही समस्या होती है। यदि इसको नियंत्रित नहीं किया गया तो यह खतरनाक रूप ले सकता है। सबसे खतरे की बात यह है कि इन कूड़ों में प्लास्टिक भी शामिल हैं। जिससे विषैली गैस तीव्र गति से निकलती हैं।
कूड़े के निस्तारण की नहीं है कोई व्यवस्था
मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। दशकों पहले सिटी ब्लाक के टांड़ गांव में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण शुरू कराया गया था। साढ़े 11 करोड़ की यह परियोजना कंपनियों की आपसी लड़ाई में फंस गई। मामला न्यायालय तक पहुंच गया और अब यह प्लांट लंबित है। इस पर अब तक साढ़े छह करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं लेकिन जो मशीनें लगाई गई थीं। वह अब जंग खा रही हैं। इससे नगर क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कूड़े को इकट्ठा करने के लिए नगर में डंपिंग जोन भी बनाए गए थे। इनमें से तीन डंपिंग जोन, बरियाघाट, टीबी अस्पताल तिराहा व मुसफ्फरगंज को हटा दिया गया। इससे भी समस्या कुछ बढ़ी है।
नपा के अधिशासी अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि कूड़ा जलाना गलत कार्य है। सभी सफाई कर्मियों को सख्त निर्देश है कि कूड़ा न जलाया जाय। इस बात की जांच की जाएगी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।