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हमारे प्रधान : मात्र 21 की उम्र में एक गांव की कमान संभाल रही हैं युवा प्रधान इरम, दूसरों के लिए बन रहीं प्रेरणा

Sat, 19 Jun 2021 10:09 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली

सार

21 वर्ष की इरम मसरूर चौहान पहली बार चुनाव लड़ी और जीत गई। उनकी मां मसनीम चौहान एक बार ग्राम प्रधान रह चुकी है।
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ग्राम प्रधान इरम मसरूर चौहान। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नाम-इरम मसरूर चौहान, शिक्षा-बीबीए, राजनीतिक पृष्ठभूमि-सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान। जी हां लोगों को जिस मुकाम को हासिल करने में लंबा वक्त लग जाता है उसे इरम ने केवल 21 वर्ष की उम्र में हासिल किया है। वह सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान हैं। इरम उम्र में भले ही कम हों लेकिन उनके इरादे बुलंद हैं। गांव के विकास के लिए वह पूरी तरह जुट गईं हैं। आइए जानते हैं युवा प्रधान इरम की सबसे कम उम्र की प्रधान बनने की यात्रा के बारे में 
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शामली जिले के गढ़ीपुख्ता में ग्राम पंचायत गुराना की जिले की सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान इरम मसरूर चौहान (21) की आयु भले ही कम है, लेकिन गांव के विकास के लिए उनके इरादे काफी ऊंचे हैं। वह कहती हैं कि गांव का विकास उनकी प्राथमिकता में है। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है, इसलिए गांव में टंकी का निर्माण कराना है।
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ग्राम प्रधान बताती हैं कि गांव में श्मशान घाट का सुंदरीकरण एवं कब्रिस्तान का मिट्टी भराव व सुंदरीकरण, सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय का निर्माण कराना है। गांव में छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा दिलाने के लिए कंप्यूटर सेंटर एवं पुस्तकालय का निर्माण कराना चाहती हैं। गांव में समस्याएं हैं, जिनमें साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्वच्छता को लेकर जिले में ग्राम पंचायत का नाम रोशन करना है।

अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं एवं लड़कियों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। जल निकासी के लिए नालों एवं नालियों के निर्माण के साथ ही तालाब का सुंदरीकरण कराया जाएगा। गांव के हर पात्र व्यक्ति को सरकारी योजना का लाभ दिलाया जाएगा। पेंशन एवं राशन कार्ड बनवाए जाएंगे। सड़कों के निर्माण के साथ ही महिलाओं को भी मनरेगा से जोड़कर उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
 
इरम मसरूर चौहान पहली बार चुनाव लड़ी और जीत गई। उनकी मां मसनीम चौहान एक बार ग्राम प्रधान रह चुकी है। पिता राव मसरूर खां एक बार गन्ना सोसायटी थानाभवन के डेलीगेट रहे हैं और पूर्व में मुजफ्फरनगर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं।
 
गांव के बारे में 
करीब 1630 मतदाता और लगभग तीन हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत में मुस्लिम राजपूत और अनुसूचित जाति की मिश्रित आबादी है। गांव के चारों ओर से प्रवेश द्वार है। पूर्वी यमुना नहर करीब एक किलोमीटर की दूरी पर बहती है। गांव में पेयजल, गंदगी, सड़कों आदि की समस्याएं हैं। ग्राम प्रधान का कहना है कि इन समस्याओं को दूर कराने का प्रयास किया जाएगा। 
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