फिजियोथेरेपी यानी शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, हड्डियों-नसों की परेशानी का वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक मशीनों के माध्यम से आराम पहुंचाना। इसके जरिये दवाओं की निर्भरता काफी हद तक कम की जा सकती है। विश्व फिजियोथैरेपी दिवस 8 सितंबर को मनाया जाता है।
डॉ. केपी सैनी ने बताया कि लाइफस्टाइल संबंधी परेशानी (मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज), पीठ, कमर, गर्दन, कंधे, घुटने का दर्द या जोड़ों का दर्द, हार्मोनल बदलाव, पेट से जुड़ी समस्याएं, खेलकूद की चोटें, ऑर्गन डिसऑर्डर, ऑपरेशन से जुड़ी समस्याएं, मांसपेशियों का खिंचाव व उनकी कमजोरी, नसों का दर्द, चक्कर आना शुरू हो जाता है। फिजियोथेरेपी से फायदा होता है।
फिजियोथेरेपी के लाभ
- यह चोट से बचने में मदद कर सकती है
- दर्द निवारण में सहायक
- चोट और आघात से उबरने का समर्थन करती है
- यह स्ट्रोक से उबरने में भी मदद कर सकती है
- गिरने से रोकने में संतुलन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है
- उम्र से संबंधित चिकित्सा समस्याओं के बेहतर प्रबंधन में मदद सकती है
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डॉ. मोहित कुमार ने बताया कि अधिकतर लोग मानते हैं कि केवल योग और कुछ कसरतें ही फिजियोथेरेपी होती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। फिजियोथेरेपी में विशेषज्ञ कई तरह के व्यायाम और नई तकनीक वाली मशीनों की मदद से इलाज करते हैं।
डॉ. रजनी यादव ने बताया कि आज की जीवनशैली में हम लंबे समय तक अपनी शारीरिक प्रणालियों का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और जब शरीर की सहनशीलता नहीं रहती है तो वह तरह-तरह की बीमारियों व दर्द की चपेट में आ जाता है। फिजियोथेरेपी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाकर दवाइयों पर निर्भरता कम करके स्वस्थ रह सकते हैं।