मेरठ जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि ओपीडी में हर माह इस तरह के 150 से अधिक मरीज आते हैं। असल में अन्य बीमारियों की तरह दिखने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि एक खास किस्म की मानसिक स्थिति अथवा विकार है। इसमें दवा से ज्यादा प्यार और प्रोत्साहन की जरूरत होती है। अगर आपके आसपास ऐसा कोई व्यक्ति है जिसमें इस तरह के लक्षण नजर आते हैं, तो उसे हतोत्साहित न करें, बल्कि सांत्वना देते रहें।
द्विध्रुवी विकार से ग्रस्त होने पर आदमी की मानसिक स्थिति भी बदल जाती है, ऐसे में उसकी भावनाओं को समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. तरुण पाल बताते हैं कि मेडिकल की ओपीडी में हर माह ऐसे मरीजों की संख्या 300 से अधिक है। व्यक्ति के मिजाज और व्यवहार में बदलाव महज तनाव नहीं है। यह ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ के लक्षण हो सकते हैं। इसमें आपकी खुशी और गम दोनों अपनी पराकाष्ठा पर होते हैं।
ऐसे करें बचाव
-मरीज को अपनी नींद का समय तय रखना चाहिए
-नशीले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए
-इस बीमारी में आत्मविश्वास बनाए रखना और खुद पर नियंत्रण भी जरूरी होता है
-दवा, मनोवैज्ञानिक इलाज और परिवार की काउंसलिंग भी जरूरी
-खैरनगर के विजय कुमार (32) कभी इतने हिंसक हो जाते थे कि कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता था। कभी एकदम शांत हो जाते थे, किसी भी बात का जवाब ही नहीं देते थे। कई बार बिना किसी कारण के रोने लग जाते थे और खुद को कमरे में बंद कर लेते थे। परिवार वाले भूतप्रेत का साया समझ रहे थे, जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो पता चला बाइपोलर डिसऑर्डर है। इलाज चल रहा है।
-जागृति विहार के नरेंद्र सिंह (53) कभी लंबे समय तक उदास हो जाते थे, बहुत गुस्सा करते थे, कम सोते थे। कभी बहुत बोलते थे, कभी बिल्कुल नहीं। परिवार ने उन्हें मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो बाइपोलर डिसऑर्डर बीमारी का पता चला। इलाज चला, वह अब ठीक हैं।