जिले की सात विधानसभा सीटों पर बृहस्पतिवार को चुनाव का रण खत्म हो गया। जहां बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की थी जो मुखर होकर अपने-अपने मनपसंद प्रत्याशी को वोट कर रहे थे, वहीं ऐसे मतदाताओं की तादाद भी काफी है, जिन्होंने कहां वोट किया, इसका जिक्र नहीं किया। या बताया तो गलत बताया। ईवीएम का बटन किसी प्रत्याशी का दबाया और बाहर आकर किसी और को वोट देना बताया। इस तरह के मतदाता चुनाव का गणित बिगाड़ने की ताकत रखते हैं।
इस चुनाव में जिस तरह से उम्मीदवारों ने अपनी तैयारी की थी, उससे भी आगे जाकर मतदाताओं ने अपना दिमाग चलाया। ज्यादातर प्रत्याशियों की हां में हां मिलाई। वोट का आश्वासन सबको दिया, लेकिन की अपने मन की। खामोशी से डाला गया यह वोट कई सीटों के समीकरण को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। सिवालखास, सरधना, किठौर, हस्तिनापुर, शहर, दक्षिण या फिर कैंट, सभी जगह इस तरह के मतदाता काफी थे।
मतदान करके आए राहुल और संजय हों या जाहिद और हमीद। पहली बार वोट डालकर आई कोमल और सुनीता। बाहर बस्ते लगाए बैठे पार्टी कार्यकर्ताओं ने जब उनसे पूछा कि वहीं वोट करके आए हो तो इन्होंने सभी को उसी पार्टी को ही वोट करने की बात बताई। यानी सबकी हां में हां मिलाई।
मतदाताओं का यह तरीका प्रत्याशियों और उनके दिग्गजों को भ्रमित कर रहा है। यह कई प्रत्याशियों के समीकरण ध्वस्त कर देगा, तो कई प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा बांध देगा। जिन सीटों पर हार जीत का अंतर कम रहेगा, वहां तो इनकी भूमिका और भी बढ़ जाएगी। अभी तक यह माना जा रहा है कि अधिकांश सीटों पर सपा-रालोद गठबंधन और भाजपा प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर है।
कांटे की टक्कर में सेंधमारी का रहेगा अहम किरदार
हार-जीत में सेंधमारी का किरदार अहम रहने वाला है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से मतदान हुआ है, उससे यह बात साफ है कि जिस प्रत्याशी ने दूसरे की वोटों में सेंधमारी की, वह बढ़त बना लेगा। कहीं-कहीं तो हारने वाला किसी प्रत्याशी को हराने की वजह बन सकता है। वोटिंग के बाद नतीजे की उत्सुकता ने चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। सेंधमारी, इसलिए भी महत्वपूर्ण रही होगी, क्योंकि कई सीटों पर कार्यकर्ता से लेकर वोटर तक में नाराजगी देखी जा रही थी। प्रत्याशियों ने भी उनमें शिफ्ट होने की संभावना तलाशी। सातों सीटों पर सेंधमारी नतीजों में अहम भूमिका निभाएगी।