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UP: ये दवा है बेअसर, बस दुआ से कीजिए बसर, कैप्सूल की जांच में मिला सिर्फ पाउडर, चिकित्सक भी हैरान

Thu, 19 May 2022 05:45 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

बिजनौर जनपद के नजीबाबाद से लिए गए अमोक्सिसिलिन के नमूना फेल होने पर चिकित्सक जहां हैरान हैं। कैप्सूल में दवा के साल्ट के नाम पर सिर्फ पाउडर मिला है।
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दवाएं। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भले ही आप अच्छे चिकित्सक से इलाज करा रहे हैं और दवा भी नियमित खा रहे हैं, लेकिन यदि यह दवा ही बेअसर होगी तो बस दुआ से ही काम चलाना होगा। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के नजीबाबाद से लिए गए अमोक्सिसिलिन के नमूना फेल होने पर चिकित्सक जहां हैरान हैं, वहीं चिंता भी जाहिर कर रहे हैं। चिकित्सक यहां तक कह रहे हैं कि ऐसी दवाएं किसी को भी गंभीर बीमारी की ओर धकेल सकती हैं। यहां तक कि ऐसी दवाओं का इस्तेमाल उनकी बीमारी को ठीक करने की बजाय बढ़ा सकता है। 
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जिले में बुधवार को नजीबाबाद के एक मेडिकल स्टोर से लिए गए अमोक्सिसिलिन 250 एमजी के नमूना जांच में फेल आया है। इसकी रिपोर्ट बिजनौर औषधि प्रशासन विभाग को मिली तो हड़कंप मच गया। हालांकि यह जिले में पहला मामला नहीं है, जब किसी दवा में शून्य प्रतिशत साल्ट पाया गया हो, पिछले दो साल में यह पांचवां दवा का नमूना था। जिसमें दवा की गायब थी। अब बात बृहस्पतिवार को फेल आए अमोक्सिसिलिन दवा के नमूने की करें तो यह दवा बच्चों को दी जाती है।

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बच्चों में 250 एमजी, युवाओं को 500 एमजी का कैप्सूल दिया जाता है। टीम ने इसी साल छह जनवरी को नजीबाबाद के मोहल्ला जाब्तागंज में आलम मेडिसन कंपनी से अमोक्सिसिलिन 250 एमजी कैप्सूल का नमूना लिया था। मेडिकल स्टोर शाह आलम के द्वारा चलाया जाता है।

अमोक्सिसिलिन का यह कैप्सूल मैक्सवेल फॉर्मूलेशन कंपनी का है। इस कैप्सूल में दवा के साल्ट के नाम पर सिर्फ पाउडर मिला है। इस कैप्सूल का प्रयोग एंटी बायोटिक के तौर पर किया जाता है। यह किसी भी तरह के इंफेक्शन के लिए होता है। चिकित्सकों का कहना है कि एंटीबायोटिक मरीज की हालत बिगड़ने, इंफेक्शन बढ़ने पर ही दी जाती है, ऐसे में यदि दवा ही ऐसी होगी तो मरीज ठीक होने के बजाय और बीमार पड़ जाएगा।

 आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है
औषधि निरीक्षक आशुतोष सिंह ने बताया कि बीते दो सालों में पांच ऐसे दवा के नमूने रहे, जिनमें दवा का साल्ट शून्य था। केवल पाउडर था। वहीं, सात दवाओं के नमूने अधोमानक पाए गए हैं। जिन पर कार्रवाई की गई है। नमूने फेल आने के मामले में सभी पर मुकदमा दर्ज है।
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ये मुकदमे अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं। दवा के नमूने में यदि पूरी तरह दवा का साल्ट शून्य मिलता है तो यह गंभीर अपराध माना जाता है। विभागीय एक्ट के मुताबिक ऐसे मामलों में आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अमोक्सिसिलिन का नमूना जो पूरी तरह से फेल आया है, जिस संबंध में मेडिकल संचालक से बिल मांगा जाएगा। अगर संचालक बिल दिखाता है तो कैप्सूल बनाने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

असरदार नहीं होगी दवा :  डॉ. आरएस वर्मा
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरएस वर्मा ने बताया कि अमोक्सिसिलिन की 250 एमजी की खुराक बच्चों और 500 एमजी की खुराक बड़ो को दी जाती है। इस कैप्सूल का प्रयोग खांसी, जुकाम, बुखार, त्वचा के संक्रमण, मूत्र मार्ग का संक्रमण दूर करने में किया जाता है। दवाई रोग पर असरदार नहीं होगी, जिसकी वजह से संक्रमण बढ़ जाएगा। 

सही दवाई न मिलने से बढ़ेगा संक्रमण : डॉ. विभू शर्मा
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विभू शर्मा ने बताया कि अमोक्सिसिलिन आम तौर पर बिकने वाला कैप्सूल है। यह बुखार, जुकाम, खांसी के संक्रमण में दिया जाता है। अगर कैप्सूल के अंदर दवाई का साल्ट नहीं होगा तो बच्चे को जो बीमारी है, वह ठीक नहीं होगी। सही दवाई न मिल पाने से संक्रमण बढ़ जाएगा, जो बच्चे की स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
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