परिवार के अन्य सदस्यों व ग्रामीणों ने तीनों को सांत्वना देेकर शांत कराया। तहेरे भाई पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुकेश चरला ने बताया कि राजदीप के बड़े भाई कुलदीप भी आर्मी से रिटायर्ड है और गांव में ही किराना की दुकान करता है। भाई को देखकर ही राजदीप ने देश सेवा करने के लिए सेना में जाने का निर्णय लिया। अंतिम विदाई के दौरान सेना के जवानों ने राजदीप को गार्ड ऑफ आनर दिया। बेटे दक्ष ने पिता राजदीप को मुखाग्नि दी। ग्रामीणों व परिजनों ने राजदीप को सेल्यूट कर अंतिम विदाई दी।
चार दिसंबर को लौटे थे बहराइच
राजदीप पिछले माह के अंत में छुट्टी लेकर अपने गांव लौटे थे। परिजनों के साथ उन्होंने कुछ दिन बिताएं और चार दिसंबर को वह बहराइच लौट गए। मुकेश ने बताया कि वापस लौटने के दौरान राजदीप लगातार अपनी पत्नी व बच्चों से फोन पर बातचीत करता था। वह बच्चों को भी देश सेवा का पाठ पढ़ाता था।
जनवरी में वापस आऊंगा
मुकेश ने बताया कि राजदीप ने रविवार को भी फोन पर बच्चों से बातचीत की। राजदीप से बच्चों ने पूछा कि पापा वापस कब आओगे तो राजदीप ने जनवरी में बच्चों से आने के लिए वादा किया था। पिता राजदीप का पार्थिव शरीर देखकर बच्चे रोते हुए बोले पापा आपने अपना वादा तोड़ दिया। आपने जनवरी में आकर हमारे साथ खेलने का वादा किया था।
ग्रामीणों की उमड़ी भीड़, नम आंखों से दी विदाई
राजदीप का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव में पहुंचा ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। राजदीप के घर के अंदर से लेकर छत तक ग्रामीणों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी हुई थी। घर में पैर रखने की जगह तक नहीं थी। अंतिम यात्रा के दौरान राजदीप को कंधा देने के लिए ग्रामीणों में होड़ लगी रही। देशभक्ति के गीतों के बीच जवान राजदीप को अंतिम विदाई दी गई। अंतिम यात्रा के दौरान हर ग्रामीण की आंख नम थी।