फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चुनाव में मुकाबला: भाजपा के सामने 54 सीटें बचाने की बड़ी चुनौती, विपक्षी पार्टियों के लिए वजूद का सवाल

Wed, 12 Jan 2022 12:30 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

पश्चिमी यूपी में भाजपा और अन्य पार्टियों के बीच कांटे का मुकाबला होने जा रहा है। पश्चिमी यूपी में जहां 54 सीटों को बचाने के लिए भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है तो वहीं अन्य पार्टियों के लिए वजूद का सवाल है।
विज्ञापन
यूपी चुनाव इतिहास - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दस फरवरी को 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने चक्रव्यूह रच लिया है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इनमें से 54 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा के सामने इन सीटों को बचाना बड़ी चुनौती है तो विपक्षी दलों के लिए वजूद का सवाल है। 

विज्ञापन


पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों में 2017 में बसपा और रालोद को सिर्फ एक-एक सीट ही मिल पाई थी। सपा को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाई थीं। मेरठ की सात में 6 सीटें भाजपा ने जीत ली थीं। मेरठ शहर सीट सपा के खाते में चली गई थी। मुजफ्फरनगर में सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा  ने जीत दर्ज की थी। 

शामली की तीन विधानसभा सीटों में से दो पर भाजपा और एक पर सपा को विजयी हुई थी। बागपत की तीन में से दो सीटों पर भाजपा और एक पर रालोद ने जीत दर्ज की थी। हालांकि बाद में छपरौली विधायक ने भी भाजपा ज्वाइन कर ली थी। गाजियाबाद की पांचों सीट भाजपा के खाते में चली गई थीं। हापुड़ की तीन विधानसभा सीटों में दो पर भाजपा और एक पर बसपा के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। गौतमबुद्धनगर की तीनों और बुलंदशहर की सातों सीट बीजेपी के खाते में चली गई थीं। अलीगढ़ की भी सभी सात सीटों पर भाजपा जीत गई थी। आगरा में सभी नौ और मथुरा की पांच सीटें भाजपा के खाते में चली गई थीं। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: कौन है जावेद हबीब: लंदन तक पहुंचे... पर अपने ही इलाके में फंस गए, थामा था भाजपा का दामन, खूब प्रसिद्ध है परिवार

विज्ञापन

इस बाद बदले हैं समीकरण 
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर थी। तब सपा और कांग्रेस ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। रालोद और बसपा अकेले ही चुनाव मैदान में थे। लेकिन इस बार चुनाव में स्थिति अलग है। रालोद और  सपा एक साथ हैं। बसपा और कांग्रेस अकेले दम पर लड़ रहे हैं। इस बार पश्चिम के इन जिलों में किसान आंदोलन का असर होने की वजह से मुकाबले कड़े हो गए हैं। 

यह भी पढ़ें: जावेद हबीब की माफी को बताया ड्रामा: ब्यूटीशियन पूजा बोली- सजा दिलाकर ही लूंगी दम, पश्चिमी यूपी में बढ़ रहा आक्रोश 
 
इन 11 जिलों में 10 फरवरी को है मतदान
मेरठ, बागपत, नोएडा, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, शामली, अलीगढ़ आगरा, मथुरा।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें