रावण को आसुरी शक्ति, असत्य का प्रतीक मानकर दशहरे के दिन जलाया जाता है। मेरठ शहर में मान्यता है कि बिना शराब पिए रावण का पुतला भी श्रीराम के सामने मैदान में खड़ा नहीं हो सकता। कारीगर रावण के पुतले को खड़ा करने से पहले उस जमीन के हिस्से में और उसके मुंह में शराब डालते हैं।
शहर में विभिन्न परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इसके पीछे कोई तर्क नहीं है, लेकिन मानने वाले इसे मानते हैं। छावनी रामलीला कमेटी के महामंत्री गणेश अग्रवाल ने बताया कि मैदान में तीन पुतले रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के खड़े किए जाते हैं। वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। रावण के पुतले को खड़ा करने से पूर्व उसके मुंह में और जिस स्थान पर उसे खड़ा किया जाना है, वहां शराब डालते हैं।
इसके बाद ही वह पुतला खड़ा हो पाता है। कारीगरों का मानना है कि अगर पुतले को शराब न पिलाई जाए तो वह मैदान में खड़ा नहीं हो पाता है। कई बार पिछले को बिना शराब पिलाई खड़ा करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह गिर गया।
यह भी पढ़ें: कवायद: यूपी में हॉट एयर बैलून से रोमांचक हवाई सफर का मजा ले सकेंगे पर्यटक, यहां चल रहीं तैयारियां
बताया गया कि अन्य रामलीला में भी इसी प्रक्रिया को अपनाया जाता है। विशाल पुतला खड़ा करने से पूर्व उसे शराब पिलाना आवश्यक मानते हैं। शहर रामलीला कमेटी की मीडिया प्रभारी संजीव गुप्ता ने बताया कि सभी रामलीला में रावण के पुतले को शराब पिलाने की परंपरा है। यह कार्य पुतला निर्माण करने वाले कारीगरों के द्वारा ही किया जाता है।
यह भी पढ़ें: कैसे हो डेंगू से मुकाबला: जांच किट ही नहीं, बागपत के जिला अस्पताल में इलाज के लिए भटक रहे मरीज