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टीबी का वार, प्रतिदिन इतने लोगों पर कर रहा प्रहार, यह लक्षण दिखें तो कराएं जांच

Mon, 02 Nov 2020 01:07 PM IST
मेरठ ब्यूरो अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
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टीबी की बीमारी
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कोरोना के साथ टीबी की बीमारी भी लोगों को चपेट में ले रही है। औसतन प्रतिदिन 24 नए टीबी के मरीज सामने आ रहे हैं। इससे साल 2025 तक टीबी मुक्त भारत मुहिम को झटका लग रहा है। आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद भी उड़ा दी है।

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इस साल पिछले करीब 10 माह (304 दिन) में टीबी के 7408 मरीज मिले हैं। इस लिहाज से रोज करीब 24 मरीज मिल रहे हैं। इनमें 4903 मरीजों की जानकारी जिला क्षय रोग विभाग की टीम ने की है और 2505 की जानकारी निजी चिकित्सकों ने दी है। इनमें 30 से 50 साल की उम्र के मरीज सबसे ज्यादा हैं। 60 प्रतिशत पुरुष और 40 फीसदी महिलाएं हैं। टीबी के इलाज के लिए मेरठ में 18 ट्रीटमेंट यूनिट हैं। एक हजार से ज्यादा डॉट सेंटर हैं और 600 से ज्यादा स्टाफ लगा हुआ है। जिले में पिछले पांच साल में 33 हजार से ज्यादा मरीजों को टीबी की पुष्टि हो चुकी है।

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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने का कारण अपर्याप्त और पौष्टिकता से कम भोजन, स्वच्छता का अभाव, कम जगह में बहुत से लोगों का रहना और टीबी के मरीज के संपर्क में रहना व उसकी चीजों को इस्तेमाल करना है। इसके अलावा टीबी के मरीजों के कहीं भी थूक देने से, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और बीच में ही दवाओं को छोड़ देना भी कारण है।

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एक मरीज 10-12 को बनाता है शिकार
टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) का अगर एक मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 12 मरीजों को बीमार कर सकता है। इससे भी भयावह हालात तब होती है जब कोई व्यक्ति संक्रमण का शिकार हो गया हो और उसे पता न चले।

यह लक्षण दिखें तो कराएं जांच
दो हफ्ते से लगातार खांसी होना
बुखार, भूख न लगना
रात में पसीना आना
वजन में लगातार गिरावट

यह है टीबी
टीबी एक गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। जानलेवा भी हो सकती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवाएं मुफ्त मिलती हैं। जिला अस्पताल में इसका केंद्र है।

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