नमामि गंगे योजना में 690 करोड़ से बनेगा एसटीपी
मेरठ। नमामि गंगे परियोजना के तहत काली नदी किनारे कमालपुर में 220 एमएलडी क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को केंद्र सरकार ने स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर 690 करोड़ रुपये खर्च होंगे। स्वीकृति मिलने के बाद जल निगम ने टेंडर जारी कर दिया है। एसटीपी संचालन के बाद शहर के नालों का गंदा पानी साफ होने के बाद ही काली नदी में बहेगा। नदी किनारे वाले गांवों के लोगों को दूषित भूगर्भ जल पीने से पनपने वाली बीमारियों से भी छुटकारा मिले जाएगा। नदी किनारे किसान अपने खेतों की सिंचाई भी काली नदी के स्वच्छ पानी से कर सकेंगे।
सरकार ने गंगा, यमुना समेत अन्य नदियों के पानी को स्वच्छ करने के लिए नमामि गंगे परियोजना संचालित की है। जगह-जगह एसटीपी लगाकर नालों का गंदा पानी साफ किए जाने की योजना है। जल निगम ने 2019 में महानगर के नालों से काली नदी में पहुंचने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए 220 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लान तैयार किया गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने 20 फरवरी, 2019 को एसटीपी का शिलान्यास किया था। जल निगम ने 690 करोड़ के एसटीपी बजट प्रस्ताव को भारत सरकार को भेज दिया था। वर्ल्ड बैंक से धन की उपलब्धता न होने के कारण एसटीपी का प्रस्ताव अटका हुआ था।
बुधवार को केंद्र सरकार ने 690 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति देते हुए 220 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी निर्माण को हरी झंडी दे दी। इसके बाद जल निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी। वर्ल्ड बैंक से धन मिल गया है।
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काली को गंदा कर रहे 350 से अधिक नाले
शहर में 350 से अधिक नाले हैं। इनमें ओडियन नाला और आबूनाला प्रथम और आबूनाला द्वितीय बड़े नाले हैं। शहर के सभी छोटे नालों का पानी ये तीन बड़े नाले काली नदी तक पहुंचाते हैं। एसटीपी लगने के बाद काली नदी में गंदा पानी नहीं पहुंच पाएगा।
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बजट के अभाव में तैयार होने थे छोटे एसटीपी
पिछले माह नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन ने कमिश्नरी सभागार में अधिकारियों को 220 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को भूलने और नालों के किनारे छोटे एसटीपी लगाने की सलाह दी थी। साथ ही सरकार के पास धन की कमी होना भी बताया था। अब सरकार से एसटीपी को स्वीकृति मिलने पर फिर से जनता को काली नदी में स्वच्छ पानी मिलने की उम्मीद जगी है।
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टेंडर कर दिया गया जारी
- काली नदी किनारे जागृति विहार में कमालपुर की भूमि पर बनने वाले 220 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी निर्माण पर 363 करोड़ रुपये और 327 करोड़ रुपये 15 साल तक एसटीपी के रख-रखाव पर खर्च किए जाएंगे। शासन से स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी कर दिया गया है। शनिवार को टेंडर अपलोड़ कर दिया जाएगा। कार्य आदेश के बाद दो साल के भीतर एसटीपी बनकर तैयार होगा। - रमेश चंद्रा, परियोजना प्रबंधक, जल निगम
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जनजागरण से निर्मल होने लगी काली नदी
इसके लिए दो महीने पहले किला परीक्षितगढ़ रोड स्थित गांवड़ी गांव से कमिश्नर सुरेंद्र सिंह के निर्देशन में अभियान को शुरू किया गया। इसमें सिंचाई विभाग, ग्राम्य विकास विभाग की ओर से कार्य किया गया। मनरेगा से श्रमिकों को लगाकर काली नदी को पुराने स्वरुप में वापस लौटाने की कवायद शुरू की गई। मुख्य विकास अधिकारी शशांक चौधरी ने खुद इस प्रोजेक्ट पर निगरानी रखने के लिए रोजाना होन वाली खोदाई से लेकर कार्य की रिपोर्ट तलब की।
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कई गांवों को मिलेगी राहत
पिछले कई वर्षों से इस प्रोजेक्ट को लाने के लिए लगे रहे। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई गांवों को राहत मिलेगी। वहीं, काली नदी अब निर्मल होगी। - राजेंद्र अग्रवाल, सांसद
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विधानसभा में रखा था मामला
सरकार से नदी को प्रदूषण मुक्त करने की मांग कर रहे थे। विधानसभा में हमने इसे प्रदूषण मुक्त करने का मामला रखा। - सत्यवीर त्यागी, विधायक, किठौर
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