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धर्म-कर्म : विशिष्ट योग में शुरू हो रहे श्रावण सोमवार, कर्क और कुंभ राशि वालों के लिए बन रहे ये विशेष योग

Sun, 25 Jul 2021 06:57 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क अमर उजाला, मेरठ
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शिव की उपासना करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala, meerut
भगवान भोलेनाथ की आराधना एवं पूजन अर्चन का सावन मास रविवार शिव के प्रिय श्रवण नक्षत्र से प्रारंभ हो गया है। श्रावण मास की प्रत्येक तिथि व दिन का अपना एक विशेष महत्व है। सावन मास में सोमवार को विशेष महत्व प्रदान किया गया है। सोमवार का दिन भगवान शिव का प्रिय दिन माना गया है।

सावन के पहले सोमवार को भगवान शिव की पूजा सौभाग्य योग में की जाएगी। इस दिन श्रावण मास की तृतीया तिथि, धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि चंद्रमा पहले सोमवार यानि 26 जुलाई को कुंभ राशि में रहेंगे और देव गुरु बृहस्पति वक्री होकर विराजमान हैं। विभिन्न राशि व नक्षत्रों के लिए यह कार्यों की सिद्धि के लिए उत्तम साबित होगा।
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शिव की उपासना करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala, meerut
पहले सोमवार को धनिष्ठा योग
धनिष्ठा का अर्थ होता है सबसे धनवान। वैदिक ज्योतिष की गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा को 23 वां नक्षत्र माना जाता है। इस योग में जन्में लोग बहुमुखी प्रतिभा और बुद्धि के धनी होते हैं। इस दिन किए शिव पूजन व रुद्राभिषेक से लक्ष्मी प्राप्ति के योग बनते है।
 
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शिव की उपासना करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala, meerut
कर्क राशि में बुधादित्य योग
श्रावण के पहले सोमवार को कर्क और कुंभ राशि में दो विशेष ज्योतिषीय योग भी बन रहे हैं। श्रावण मास के पहले दिन ही दोपहर बाद बुध ग्रह कर्क राशि में प्रवेश कर गए हैं। जहां सूर्य पहले से ही विराजमान हैं। बुध के आने से कर्क राशि में सूर्य - बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है।

 

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शिव की उपासना करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala, meerut
ज्योतिष शास्त्र में बुधादित्य योग को बहुत ही शुभ योग माना गया है। वहीं दूसरी ओर देवगुरु बृहस्पति कुंभ राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं। आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि गुरु को ज्योतिष शास्त्र में एक शुभ ग्रह माना गया है।

सावन के पहले सोमवार को चंद्रमा भी कुंभ राशि में गोचर करेगें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा और गुरु की युति बनती है तो गजकेसरी योग का निर्माण होता है। गजकेसरी योग को बहुत ही उत्तम योग माना गया है।
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शिव की उपासना करते श्रद्धालु - फोटो : amar ujala, meerut
श्रावण सोमवार भगवान शिव का अभिषेक
सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा विधि पूर्वक करने से शुभ फल प्राप्त होता है। ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि कर घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।

शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल और दूध के साथ धतूरा, बेलपत्र, पुष्प, गन्ने का रस आदि अर्पित करें। इसके साथ ही चन्दन अक्षत व फूल आदि से श्रृंगार करें इसके पश्चात भगवान की प्रिय चीजों को भोग लगाएं। शिव आरती और शिव चालीसा, शिव के 108 नामों के साथ इस मंत्र का जाप करें।
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