ऐसे करें भगवान शिव को प्रसन्न
भगवान शिव के भक्त इस पूरे महीने में भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार से प्रयत्न करते हैं। इसके लिए भक्त व्रत, जप, शिव अभिषेक, शिव पूजन, शिव पुराण, कथा श्रवण करते हैं। आचार्य रोहित वशिष्ठ और तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय का कहना है कि समस्त देवी देवताओं में भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद आसान है। श्रावण मास में व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव की पूजा करने के लिए सबसे सरल विधि है कि प्रातकाल स्नान कर भगवान शंकर के मंदिर में जाकर शिवलिंग के समक्ष बैठकर पूजा अर्चना करें। भगवान शिव की पूजा से पहले शिव के गणों की पूजा करनी चाहिए। इनमें श्री गणेश जी, माता पार्वती, श्री कार्तिक भगवान, श्री नंदीश्वर, सर्प, गंगा शामिल है।
पूजा में कम से कम पांच वस्तुओं का करें इस्तेमाल
भगवान शिव की पूजा ऊं नम: शिवाय मंत्र से की जाती है। अत: कोई भी पूजन सामग्री भगवान शिव को अर्पण करते हुए ऊं नम: शिवाय का जप अवश्य करना चाहिए। भोलेनाथ की पूजा कम से कम पांच वस्तुओं से करनी चाहिए। इनमें चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धूप, दीपक और भोग शामिल है। यह पांच वस्तुएं भगवान को अवश्य अर्पण करनी चाहिए। सर्वप्रथम भगवान शिव और उनके गणों को प्रणाम करना चाहिए। उसके बाद भगवान शिव को शुद्ध जल से स्नान कराना चाहिए। गाय का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करना चाहिए। प्रभु को स्नान कराने के बाद उन्हें गंगाजल से दोबारा स्नान कराएं। उसके पश्चात चंदन का तिलक लगाएं। बेलपत्र भगवान को चढ़ाए, धूप-दीप दिखाएं, भोग लगाएं। इसके साथ ही एकांत स्थान में बैठकर 1080 बार ऊं नम: शिवाय का जाप करें।
सोमवार को विशेष महत्व, 30 जुलाई की शिवरात्री
श्रावण मास के सोमवारों का अत्यधिक महत्व है। सावन के महीने में सोमवार के दिन भगवान शंकर की पूजा अर्चना करने पर कई गुणा लाभ मिलता है और भक्त को कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस बार पहला सोमवार 22 जुलाई और आखिरी चौथा सोमवार 12 अगस्त को पड़ रहा है। श्रावण 17 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त वाले दिन रक्षा बंधन पर्व तक चलेगा। 30 जुलाई को शिवरात्री मनाई जाएगी।
आज से निकल पड़ेंगे कांवड़िए
श्रावण मास शुरू होने के साथ ही बुधवार से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी। सहारनपुर के रास्ते पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और आसपास के जिलों के लाखों कांवड़िएं हर वर्ष हरिद्वार और ऋषिकेश गंगाजल लेने जाते हैं और इसी रास्ते से लौटते हैं। शिवरात्री से तीन पूर्व बड़ी संख्या में डाक कांवड़ चलती है। इस बार भी पूरे कांवड़ मार्ग पर हर वर्ष की तरह 20 से अधिक शिविर संस्थाओं द्वारा लगाए जाएंगे।
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