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सामने मंदिर, बगल में गुरुद्वारा...ये है सौदागरान मस्जिद, सुंदर नक्काशी और आकर्षण का केंद्र

Thu, 16 May 2019 05:28 PM IST
Dimple Sirohi एम. फुरकान, अमर उजाला, मेरठ
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सौदागरान मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ कैंट के सदर बाजार की सौदागरान मस्जिद क्षेत्र में सौहार्द का प्रतीक है। यह सौदागरान मस्जिद करीब 170 वर्षों से मुस्लिम धर्म की आस्था का केंद्र है। यह अपनी सुंदर नक्काशी के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। यहां नमाज अदा करने आने वाले लोग मस्जिद की नक्काशी देखकर उस दौर की कारीगरी का लोहा मानते हैं।

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170 साल पुरानी मस्जिद
समाजसेवी नसीम अहमद जौहरी ने बताया कि मस्जिद का निर्माण करीब 1257 हिजरी में हुआ था। रमजान के मुबारक माह में यहां रोजेदारों की भीड़ उमड़ती है। मस्जिद में रोजा इफ्तार का पूरा प्रबंध रहता है। रमजान के महीने में मौलाना मुफ्ती शफीउल्लाह तरावीह की नमाज में कुरान सुना रहे हैं। 

घनी आबादी एवं व्यस्त बाजार के बीच स्थापित यह मस्जिद कौमी एकता प्रतीक है। बाजार के अधिकतर व्यापारी गैर मुस्लिम समाज से हैं। इसके बाद भी यहां हर त्योहार पर रौनक रहती है। इस मस्जिद की खास बात है कि यहां से कुछ फासले पर गुरुद्वारा और काली माता का मंदिर भी है। क्षेत्र सुबह शाम मस्जिद की अजान, मन्दिर की घंटियों और गुरुवाणी की आवाज से गूंजता रहता है। आस्था के केंद्र हर धर्म के लोगों को आपसी भाईचारे और सामुदायिक सद्भावना का संदेश दे रहे हैं। 

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रोजा इफ्तार का रहता है पूरा इंतजाम
रमजान में रोजेदारों की सेवा करना बड़े सवाब का काम है। पहले रोजेदारों को सहरी के लिए जगाने के लिए टोलियां मोहल्लों में घूमा करती थीं। इन टोलियों में युवाओं के साथ बच्चे भी होते थे, जो घर-घर जाकर दरवाजा खटखटाते थे। अब समय बदल गया है। ऐसी टोलियां दिखाई नहीं देतीं। इसका कारण लोगों में मेलजोल खत्म होना भी है।

घंटाघर के मोहल्ला कोटला निवासी बुजुर्ग हफीजुद्दीन बताते हैं कि पहले आदमी इशा के नमाज के बाद बेफिक्र होकर सोता था। ये टोलियां सहरी से एक घंटा पहले ही जगा देती थीं। गुजरी बाजार के हाजी शम्स कादरी ने बताया कि रोजेदारों को सहरी के लिए जगाना भी सवाब का काम है। कभी इन टोलियों में शामिल रहे खैरनगर के जमील अहमद बताते हैं कि संसाधनों के बढ़ते उपयोग के कारण रोजेदारों को जगाने वाली टोलियों की अहमियत कम हो गई है। 

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