फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वतन वापसी की जद्दोजहद: मानसी व श्वेता ने बयां किया नवीन की मौत के दौरान खारकीव का मंजर, दहशत के बीच आज लौटेंगे कई छात्र

Wed, 02 Mar 2022 01:15 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

यूक्रेन से मेरठ के पांच छात्र सकुशल अपने घरों को लौट आए हैं। मेरठ के स्नेहाशीष की आंखें परिजनों से मिलकर नम हो गई तो वहीं रोहटा रोड निवासी रोहटा रोड के मिर्जापुर निवासी मेडिकल छात्र इज़हार त्यागी के दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। आज उनके साथ कई अन्य छात्र स्वदेश लौट सकते हैं। 
 
विज्ञापन
1 of 7
श्वेता सैनी व मानसी शर्मा और घर लौटे स्नेहाशीष - फोटो : अमर उजाला
मेरठ के गंगानगर निवासी श्वेता सैनी व सूर्यपुरम की मानसी शर्मा बम धमाके के दौरान खारकीव में ही मौजूद थीं। मानसी के पिता सुनीत शर्मा ने बताया बम धमाका इतना भयंकर हुआ कि सड़क में गहरा गड्ढा हो गया। इसी हादसे में कर्नाटक के नवीन की जान चली गई। 

इस बम धमाके के बाद भारतीय छात्र-छात्राएं ट्रेन से लवीब के लिए निकल गए हैं। ये वहां से यूक्रेन-हंगरी बॉर्डर पार करेंगे। वहीं गंगानगर की श्वेता सैनी के पिता डा. रमेश सैनी ने बताया हादसे मंगलवार की शाम को बात हुई। पिछले छह दिन से नूडल्स व चिप्स खाकर काम चला रहे हैं, जबकि खारकीव में हादसे के समय वे नवीन और अन्य छात्रों के साथ ही मेट्रो स्टेशन के बंकरों से निकले थे। सभी छात्र अलग- अलग दुकानों पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान ये हादसा हो गया। जिसमें नवीन की मौत हो गई।

श्वेता के पिता बोले पता नहीं क्या होगा: खारकीव में हादसे के बाद परिजन बेहद खौफजदा हैं। खारकीव में मौजूद श्वेता सैनी के पिता रमेश सैनी बोले एंबेसी हमारे बच्चों को खाना तक मुहैय्या नहीं करा सकी। ऐसे में उनकी जान बचाने को लेकर ठोस कदम कैसे उठा रही होगी। हादसे में कर्नाटक का नवीन अपनी जान से चला गया। वे सरकार से छात्रों को बचाने के लिए मदद मांग रहे हैं।
विज्ञापन

2 of 7
भारतीय छात्रों को लाने के लिए तैयार विमान - फोटो : अमर उजाला
सकुशल पहुंचीं तमन्ना दिल से नहीं निकल रहा खौफ  
यूक्रेन से चोटिल अवस्था में स्वदेश लौटी खरखौदा के पांची गांव की तमन्ना दिल्ली में ही अपनी एक रिश्तेदारी में पहुंच चुकी हैं। जहां मंगलवार को उसने अपनी बुआ व दोस्त के साथ शॉपिंग की। यूक्रेन का मंजर दिमाग में आते ही वह सिहर जाती है। जहां अपने स्वदेश लौटने के लिए उसे कड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। तमन्ना के पिता अतुल त्यागी ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर मची भगदड़ में उसकी तीन सहेलियां गंभीर घायल हो गईं। तमन्ना का सामान भी वहीं छूट गया पर उन्होंने अपने शैक्षिक प्रमाणपत्रों को बचा लिया। तमन्ना की मां रीना ने कहा कि बुधवार को बेटी उनके पास आएगी। 

हंगरी के लिए बस से रवाना हुए अरहान
गढ़ रोड गोकलपुर निवासी मोहम्मद अरहान सोमवार को इवानो फ्रंकिवस्क से ट्रेन से हंगरी के लिए निकले थे, देर रात वो विनित्सा शहर रूके। जिसके बाद सुबह ही वो बस से हंगरी के लिए रवाना हो गए हैं। अरहान ने पिता मोहम्मद असगर को गाड़ी व अपनी फोटो भी शेयर की है। इसी बस में लखनऊ की गरीमा मिश्रा भी हैं, जिन्होंने वीडियो जारी कर भारत सरकार से मदद मांगी थी। पिता ने बताया कि वे यूक्रेन व हंगरी बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। लेकिन बॉर्डर पार करने की जानकारी नहीं मिल पाई है।  

रोहटा रोड के मिर्जापुर निवासी मेडिकल छात्र इज़हार त्यागी के दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। परिजन बेसब्री से वापसी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं किठौर के कई छात्र वीजा मिलने के बाद अभी रोमानिया में ही फ्लाइट के इंतजार में हैं।
विज्ञापन

3 of 7
मीनाक्षीपुरम की छात्रा अक्षिता - फोटो : अमर उजाला
हंगरी बार्डर पर हैं मीनाक्षीपुरम की अक्षिता
यूक्रेन में रहकर पढ़ाई कर रहीं गंगानगर की मीनाक्षीपुरम की छात्रा अक्षिता हंगरी के बार्डर पर फंसी हुई है। भारतीय दूतावास द्वारा उन्हें वहां निकालने का प्रबंध किया जा रहा है। अक्षिता के पिता केपी यादव गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में जेई हैं।

मंगलवार को अक्षिता हंगरी के बार्डर पर पंहुच गईं। केपी यादव ने बताया कि भारतीय छात्रों का एक समूह हंगरी बार्डर स्थित एक रेलवे स्टेशन पर रुका है। वहां खाने-पीने व रुकने की व्यवस्था है। छात्रों द्वारा भारतीय एंबेसी व मंत्रालय में संपर्क किया गया। हंगरी बार्डर से छात्रों को बस के जरिए हंगरी के एक शहर में ले जाया जाएगा। इसके लिए वीसा व अन्य जरूरी दस्तावेजों का प्रबंध हो गया है। हंगरी पंहुचने के बाद छात्रों को भारत लाया जाएगा। मिनाक्षीपुरम निवासी परिजन लगातार छात्रा के संपर्क में बने हुए हैं।

4 of 7
भारत पहुंचे स्नेहाशीष - फोटो : अमर उजाला
हंगरी शेल्टर होम पहुंचे उजैर 
हापुड़ रोड भवानी नगर निवासी उजैर अहमद के पिता लइक अहमद ने बताया कीव से निकलकर हंगरी बॉर्डर पार कर लिया है। उजैर ने वीडियो कॉल कर बताया कि वो हंगरी में शेल्टर होम में पहुंच गए हैं। यहां खाने पीने की पूरी व्यवस्था अच्छी है। लेकिन हंगरी से किस समय एयरपोर्ट के लिए निकलेंगे, इसका एंबेसी ही बताएगी।

स्नेहाशीष की देररात सकुशल वतन वापसी   
रोहटा रोड सरस्वती विहार निवासी स्नेहाशीष रोमानिया से फ्लाइट से मंगलवार रात 11 बजकर 5 मिनट पर दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच गए हैं। पिता संतु मालाकर ने बताया कि रात में ही स्नेह मेरठ लौट आएंगे। बेटे के सकुशल वापस लौट आने पर परिजनों ने खुशी जताई है। स्नेहाशीष घर पहुंचे तो परिवार ने स्वागत किया। परिजनों ने गले लगाया तो आंखें नम हो गईं। स्नेहाशीष ने बताया कि अन्य छात्र आज भारत लौट सकते हैं।
विज्ञापन

5 of 7
उजैर अहमद - फोटो : अमर उजाला
हंगरी बॉर्डर के लिए निकले विधु यादव
यूक्रेन के प्रमुख शहर विन्नित्सा की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे रोहटा रोड निवासी विधु यादव अपने हॉस्टल से हंगरी बॉर्डर के लिए निकल गए हैं। अमर उजाला से बातचीत में विधु ने बताया कि विन्नित्सा से हंगरी बॉर्डर करीब 600 किलोमीटर है और वहां तक पहुंचने में 10 से 11 घंटे का समय लगने की उम्मीद है।

मंगलवार को नायब तहसीलदार सदर आरएस गौड़ ने रोहटा रोड स्थित विधु के घर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और हर संभव मदद का भरोसा दिया। विधु के पिता राकेश यादव ने बताया कि उनकी विधु से लगातार बात हो रही है। विधु बॉर्डर पर पहुंचकर आगे के हाल की जानकारी देगा।
विज्ञापन

6 of 7
izhar tyagi - फोटो : अमर उजाला
रोमानिया बॉर्डर से होते हुए भारतीय कैंप पहुंचीं काजल
रोहटा रोड सरस्वती विहार दिलावर पैलेस निवासी विनोद कुमार की बेटी काजल वर्मा मंगलवार को यूक्रेन से रोमानिया बॉर्डर होते हुए भारतीय कैंप में पहुंच गईं। बुधवार को काजल की वतन वापसी हो सकती है।
काजल ने फोन पर माता-पिता को बताया कि वह अब स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रही हैं। कैंप में खाने-पीने का सामान भी मिल रहा है। उधर समाजसेवी दुष्यंत रोहटा ने बताया कि वापसी पर काजल का स्वागत किया जाएगा।  

मैकोलिव में ही फंसे प्रियांशु 
मैकोलिव शहर में फंसे मलियाना निवासी एमबीबीएस चौथे वर्ष के छात्र प्रियांशु का परिवार चिंता में है। पिता विनोद प्रभाकर ने बताया मैकोलिव में बेसमेंट में बने बंकरों में साढ़े तीन सौ छात्र फंसे हुए थे। तीन-चार बसें भरकर चली गई, लेकिन जिस बस में प्रियांशु को जाना था वो नहीं आई। जिसके चलते 66 छात्र बंकरों में फंसे हुए हैं, पिता ने कहा पता नहीं किस्मत क्या लिखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
यूक्रेन से किठौर लौटी उरूज फातिमा अपने परिवार के साथ। संवाद - फोटो : अमर उजाला
बेसमेंट में रही...20 किलोमीटर पैदल चल एयरपोर्ट पहुंची 
यूक्रेन से किठौर मे ननिहाल पहुंचीं उरूज फातिमा ने बताया कि वह लाइटें बंद कर बेसमेंट में रहीं। यूनिवर्सिटी खाली कर खाने का सामान लेकर निकले। रोमानिया आने के लि 30 हजार रुपये में टैक्सी की, लेकिन रास्ते में जाम लगने के कारण करीब 20 किमी पहले ही उतार दिया। पैदल चलकर रोमानिया एयरपोर्ट पहुंचे।

उरूज के पहुंचने पर परिजनों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शुभचिंतकों का तांता लगा रहा। वह यूक्रेन के लवीव शहर की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की द्वितीय वर्ष की छात्रा है। उसने बताया कि यूक्रेन में भारत के करीब 15 से 20 हजार छात्र फंसे हैं। रोमानिया बॉर्डर पर दो हजार छात्र फ्लाइट के इंतजार में हैं। उरूज ने बताया की उसके पिता मोहम्मद आरिफ इंजीनियर हैं, मां फरहत जहां, भाई तारिक और सारिक हैं। उसके बारे में जानकारी करने के लिए एसीएम तृतीय अरुण कुमार भी उनके घर पहुंचे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें