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हस्तिनापुर में उत्खनन जारी: पांडव टीले से मिलीं ये दुर्लभ चीजें, देखिए तस्वीरें

Tue, 01 Mar 2022 11:23 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
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excavation in Hastinapur - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को प्राचीन पांडव टीले पर पिछले चार दिनों के बाद उत्खनन कार्य शुरू हुआ जिसमें पुरातत्व विभाग की टीम को कई प्राचीन अवशेष और टेराकोटा के रिंग वेल प्राप्त हुए। पांडव टीला उल्टा खेड़ा पर मेरठ सर्किल के पुरातत्व विभाग के उच्च अधिकारियों के नेतृत्व में चल रहा खोदाई कार्य बारिश के बाद बंद हो गया था। 

सोमवार को पुरातत्व विभाग की टीम को मिट्टी के प्राचीन चित्रित मृदभांड, प्राचीन दीवारें, टेराकोटा के ढक्कन के अवशेष, मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं। इसके साथ ही एक ट्रेंच में दो टेराकोटा के रिंग वेल निकले हैं।
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excavation in Hastinapur - फोटो : अमर उजाला
पहले रिंग वेल की खोदाई पुरातत्व विभाग की टीम ने करीब  चार फीट तक कर दी है। वहीं सोमवार को उसी रिंग वेल के पास करीब 6 फीट की दूरी पर दूसरा प्राचीन रिंग वेल प्राप्त हुआ है। सोमवार को मिले सभी अवशेष किस काल के हैं यह जानने के लिए इन्हें पुरातत्व विभाग की लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा।

 
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हस्तिनापुर। - फोटो : amar ujala
पूर्व में हुई खोदाई में भी मिले थे प्राचीन अवशेष
पांडव टीले पर 1950-52 में भी सरकार द्वारा उत्खनन कार्य कराया गया था जहां पर कई प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए थे परंतु किन्ही कारणों से उत्खनन कार्य रोक दिया गया था अब 70 वर्ष बाद एक बार फिर सरकार ने पांडव टीले पर उत्खनन कार्य शुरू कराया है जिसमें कई प्राचीन अवशेष अभी तक पुरातत्व विभाग की टीम को मिल चुके हैं और बड़े साक्ष्य मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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हस्तिनापुर में उत्खनन। - फोटो : amar ujala
पांडव टीला उल्टा खेड़ा से उत्खनन के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम को ऐतिहासिक युग के कई प्राचीन अवशेष मिले। इनमें दो प्राचीन मनके, सिलबट्टा, प्राचीन मृदभांड, टेराकोटा की खिलौना गाड़ी का एक पहिया व टेराकोटा की डिस्क, टेराकोटा का प्राचीन झावा, हड्डियों के अवशेषों के साथ-साथ कार्बोनेटेड चावल, गेहूं, एवं उड़द की दाल के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
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हस्तिनापुर में उत्खनन। - फोटो : amar ujala
प्राचीन मिट्टी के बर्तनों के अवशेष टेराकोटा के अवशेष प्राप्त हो रहे हैं। पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा किए जा रहे उत्खनन में अभी तक ऐतिहासिक काल की खुदाई चल रही है। उत्खनन में निकलीं कुछ दीवारें राजपूत काल की बताई जा रही हैं। अभी तक उत्खनन में मिले अवशेषों को विभाग की टीम ने अलग-अलग एकत्रित कर जांच के लिए पुरातत्व विभाग की लैब में भेजा है। 
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हस्तिनापुर में उत्खनन। - फोटो : amar ujala
वहीं खुदाई के दौरान ट्रेंच में मिट्टी की नई लेयर आने पर मिट्टी की सैंपलिंग की जा रही है ताकि वह किस कालखंड से जुड़ी है इस बात की जानकारी भी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से मिल सके। उत्खनन के दौरान मिट्टी में मिलने वाले बारीक से बारीक अवशेषों की भी गहनता से जांच की जा रही है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी लगातार मिट्टी को छानकर उसमें मिलने वाले हर कण की जांच कर रहे हैं। ताकि इतिहास को बयां करने वाला कोई भी अवशेष न छूटने पाए। इस लिए खुदाई के बाद सभी अवशेषों को बारीकी से गहनता से जांच पड़ताल हो रही।
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