अक्सर आप बाजार जाते हैं तो बच्चे की जिद पर उसे सॉफ्ट ड्रिंक पिलाने को तैयार हो जाते हैं। लेकिन भ्रामक प्रचार कर बेची जा रही अधिकांश ड्रिंक आपके बच्चे की सेहत को बिगाड़ रही हैं। यही नहीं, उन्हें स्थायी तौर पर बीमार बना रही हैं। इसलिए बाजार जाए तो बच्चों को सॉफ्ट ड्रिंक से बचाकर रखें।
यह भी देख लें कि जिस स्कूल में आपका बच्चा पढ़ता है, वहां पर सॉफ्ट या एनर्जी ड्रिंक का सेवन तो नहीं कर रहा है। क्योंकि स्कूल की कैंटीनों में ऐसी ड्रिंक की भरमार रहती है और बच्चे उसे बड़ी मात्रा में पीते हैं। एफडीए द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट से साफ हो गया है कि भ्रामक प्रचार कर बेची जा रही सॉफ्ट ड्रिंक के नाम पर अल्कोहल बेचा जा रहा है। जो शरीर के लिए काफी हानिकारक है।
इसलिए खासतौर से ऐसी सॉफ्ट ड्रिंक को लेकर तो सावधान हो जाएं, जिन पर लिखा हो कि यह थकान को दूर करती है, एकाग्रता को बढ़ाती है और कमजोरी को दूर करती है। ऐसी ड्रिंक महज धोखा दे रही है। जो कैफीन जैसा अल्कोहल मिलाकर आपके बच्चे में नशे की लत डाल रही है।
सेहत पर ऐसे डालेगी असर
- पेट में जलन व इंफेक्शन का रहना
- बार-बार बुखार का आना, कमजोरी महसूस होना
- आपके बच्चे का अत्यधिक वजन बढ़ना या कम होना
- हाथों व पैरों में लंबे समय तक दर्द रहना, नींद कम आना
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का लगातार कम होना
कैफीन ज्यादा तो साइड इफेक्ट तय
एनर्जी ड्रिंक के तौर पर बेची जा रही रेडबुल में कैफीन की मात्रा अधिक पाये जाने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग साफ कर चुका है कि यह सेहत के लिए खतरनाक है। चिकित्सकों का भी कहना है कि सॉफ्ट ड्रिंक के अंदर अगर कैफीन अधिक है तो उसके शरीर पर कई तरह के नकारात्मक असर पड़ेंगे। खासकर पेट से लेकर मानसिक बीमारियां होने की अधिक संभावना रहती है। ऐसे लिक्विड का लंबे समय तक सेवन करने को एडिक्ट भी कहा जाता है।
कोट
कैफीन लिमिट से ज्यादा लेने पर मानसिक बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। क्योंकि कैफीन लगातार लेने से शरीर में एनर्जी महसूस होती है और लगातार लेने पर एक तरह से नशे की श्रेणी में आती है।- डॉ. रवि राणा, मनो चिकित्सक, मेडिकल कॉलेज
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शरीर में क्षमता से ज्यादा कोई भी पदार्थ लेने का विपरीत असर होने लगता है। इसी तरह से अगर कैफीन अधिक मात्रा में शरीर के अंदर जाती है तो पेट में इंफैक्शन, जलन से लेकर कमजोरी रहना व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। जिससे व्यक्ति बीमारियों से घिरता चला जाता है। - डॉ. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजीशियन