जिले से 15 किमी. दूर बसे ग्राम बिजौली में धुलहंडी के दिन तख्त निकालने की परंपरा आज भी चली आ रही है। इलाके के लोग सैंकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा को संजोए हुए हैं। यह प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है।
जानकारी के अनुसार बिजौली गांव मराठा राजे रणविजय सिंह ने बसाया था। उनके शासनकाल में घोर आपदाओं, भयंकर बीमारियों, फसलों की बर्बादी का काल देखने को मिला था। गांव से गुजर रहे बाबा गंगापुरी ने राजा रणविजय सिंह से आपदाओं से गांव को छुटकारा पाने का तरीका बताया। राजा ने बाबा गंगापुरी की बात मान कर पूरे परिवार और ग्रामीणों के साथ महायज्ञ का आयोजन किया।
यज्ञ के सफल होने के उपरांत धुलहंडी के दिन बाबा गंगापुरी के बताए गए के अनुसार तीन युवकों को देवता रूपी वस्त्र पहनाकर होली की राख उनके बदन पर मल कर लोहे, चांदी-सोने से बने औजारों से उनके शरीर को बांधकर तख्त पर खड़ा कर पूरे गांव मे सभी मोहल्लों, चौराहों, मंदिरों से गुजर कर बाबा गंगापुरी की समाधि पर ले जाया जाता है। इस परंपरा को बिजौली गांव आज भी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाता है।
शुक्रवार को धुलहंडी के दिन बिजौली गांव में 6 तख्त निकाले गए । जिस पर ग्रामीणों ने प्रसाद, चादर, रुपये चढ़ाकर अपने उज्जवल भविष्य की मन्नत मांगी। होलिका माई की जयकारों के बीच सभी तख्तकों पूरे गांव में घुमाया गया। ग्रामीणों ने हुई-हुई के नारे लगाकर युवकों में जोश भरा। पहला तख्त गंगापुरी बाबा मोहल्ला जाटव समाज शिवराज जाटव के घेर से निकला बिंधने वाले युवक सोनू गुर्जर, पवन कुमार, शिवराज जाटव।
दूसरा तख्त गोला कुआं मोहल्ला वीरेंद्र शर्मा के घेर से निकला। तीसरा व चौथा तख्त खेड़े वाले मोहल्ले महेश त्यागी के घेर से निकला। पांचवा तख्त चौधर पेड़ा मोहल्ले से गुरुदत्त त्यागी के घेर से निकला। छटा तख्त पछायला मोहल्ले से अज्जू त्यागी के घेर से निकला। इस दौरान डैनी त्यागी, निक्की त्यागी, शुभम त्यागी, ओम प्रकाश प्रजापति, अमित टेलर, सौरभ त्यागी आदि मौजूद रहे।