सूबे के मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित राशि के तौर पर दस दस लाख दिए जाने पर पैरालंपियनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जब सामान्य खिलाड़ियों को 25 25 लाख दिए गए हैं तो फिर दिव्यांगों को दस लाख क्यों दिए जा रहे हैं। इसका अब खिलाड़ियों ने विरोध जता दिया है।
दशहरे से पहले उप्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ में टोक्यो पैरालंपिक में पदक विजेता व प्रतिभाग करने वाले पैरा खिलाड़ियों को सम्मानित करेंगे। लेकिन सम्मान समारोह से पहले ही पैरा खिलाड़ियों को मिलने वाली सम्मानित राशि से नाराज हैं। खिलाड़ियों को सूचना मिली है प्रदेश सरकार प्रतिभाग करने वाले पैरालंपियनों को 10-10 लाख रुपए देने वाली है। जिसका खिलाड़ियों ने विरोध शुरू कर दिया है।
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खिलाड़ियों का कहना है नई खेल नीति में दिव्यांगों को सामान्य खिलाड़ियों की तरह तरजीह देने पर मुहर लग चुकी है। ये कौन सी नीति में बदलाव हुआ है, जो ओलंपिक और पैरालम्पियनों में भेदभाव हो रहा है।
नई खेल नीति में प्रदेश सरकार ने ही दिव्यांगों को सम्मान देने पर सहमति जताते हुए बदलाव किए थे। लेकिन सरकार ही भेदभाव करेगी तो खिलाड़ियों का मनोबल गिरेगा। मामले में मैंने मुख्यमंत्री को शिकायत की है। - सचिन चौधरी, पूर्व पैरालंपियन
दिव्यांग खिलाड़ी जीवन में संघर्ष करते हुए पैरालंपिक तक पहुंचता है। नई खेल नीति के बावजूद ये अनदेखी करना ठीक नहीं है। उनको सामान्य खिलाड़ियों की तरह सम्मान मिलना चाहिए। - गौरव त्यागी, दिव्यांगों के एथलेटिक कोच
सरकार को हमें सामान्य खिलाड़ियों की तरह सम्मान देगी तो हमारा हौसला बढ़ेगा। ऐसे निर्णय से तो पैरालंपियन नहीं सभी दिव्यांगों का मनोबल गिरेगा। - रवि यादव , अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट
सरकार को दिव्यांगों का हौसला बढ़ाना चाहिए, सामान्य खिलाड़ियों की अपेक्षा हम लोग अधिक मेहनत करते हैं। प्रतिदिन दिव्यांगता को मात देकर मैदान पर डटते हैं। - फातिमा खातून, अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट