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महाभारतकालीन है हस्तिनापुर का पांडेश्वर महादेव मंदिर

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महाभारतकालीन है हस्तिनापुर का पांडेश्वर महादेव मंदिर
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हस्तिनापुर। महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी के पांडव टीले के समीप मौजूद पांडेश्वर महादेव मंदिर देश ही नहीं, विदेशों में भी विश्व विख्यात है। दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते रहते हैं। शिवरात्रि पर यहां लगने वाले विशाल मेला लगता है। हजारों कांवड़िया भक्त यहां पर अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर शिवरात्रि के अवसर पर कांवड़ चढ़ाकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हस्तिनापुर भारत के प्रमुख व मशहूर स्थानों में से एक है। इसका महाभारत में वर्णित कई घटनाओं से संबंध है। यहां एक से बढ़कर एक कई पौराणिक धार्मिक स्थल हैं। हस्तिनापुर जैन, हिंदू एवं सिख धर्म का पवित्र स्थल है। इसी पवित्र नगरी में प्रसिद्ध पांडेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर को लेकर लोगों की मान्यताएं हैं कि यहां आने वाले भक्त बाबा भोलेनाथ से मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद लेकर जाते हैं।
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मंदिर में होती है हर मनोकामना पूरी
यह मंदिर हस्तिनापुर के सुंदर स्थानों में शामिल है। यहां वन और झीलें लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर परिसर स्थित प्राचीन विशाल वट वृक्ष है। इस वृक्ष के नीचे भी श्रद्धालु दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करते हैं। यहीं पर प्राचीन शीतल जल का कुआं है। इसका जल श्रद्धालु अपने साथ ले जाते हैं। इस जल कोघर में छिड़कने से शांति मिलती है। किवदंती है कि महाभारत काल में पांडु पुत्र युधिष्ठिर ने धर्मयुद्ध से पूर्व यहां शिवलिंग की स्थापना कर बाबा भोलेनाथ से युद्ध में विजयी होने की मन्नत मांगी थी। मंदिर के समीप गंगा की धारा बहती थी। पांचों पांडव भाई प्रतिदिन इस मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे।
मंदिर में लगी है पांचों पांडवों की मूर्ति
मंदिर में लगी पांच पांडवों की मूर्ति महाभारतकालीन है। इसका अंदाजा उनकी कलाकृति से लगाया जा सकता है। यहां स्थित शिवलिंग प्राकृतिक है। यह शिवलिंग जलाभिषेक के चलते आधा रह गया है।
पांडव टीले पर मौजूद है जयंती माता
मान्यता है कि पांडेश्वर महादेव के दर्शन करने के बाद जयंती माता के दर्शन करने बहुत जरूरी हैं। उसके बाद ही यहां फल मिलता है। जयंती माता पांडवों की कुलदेवी भी मानी जाती हैं। मंदिर के संस्थापक सुदेश कुमार का कहना है कि पुराणों में यह बात अंकित है कि पांडवों को कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र जयंती माता से ही प्राप्त हुए थे। पांडेश्वर महादेव मंदिर और जयंती माता की पूजा के बाद ही उन्हें कुरुक्षेत्र के मैदान में विजय प्राप्त हुई थी। इसलिए ऐतिहासिक नगरी में इन स्थानों का बड़ा महत्व है।
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शिवरात्रि पर बढ़ जाती है दिव्यता और भव्यता
इस मंदिर में मांगी गई हर मन्नत बाबा भोलेनाथ पूरी कर देते हैं, जिसका उदाहरण शिवरात्रि के अवसर पर यहां देखने को मिलता है। क्षेत्र के हजारों कांवड़िया भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर बाबा भोलेनाथ पर कांवड़ चढ़ाते हैं और बाबा से अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इस अवसर पर प्राकृतिक सौंदर्य के प्रतीक पांडेश्वर महादेव मंदिर की दिव्यता और भव्यता मन को रोमांचित कर देती है।
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