तीन दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेशभर में रैन बसेरों की व्यवस्था सुधारने की बात कही थी। लेकिन मेरठ के रैन बसेरों में इन निर्देशों को हवा में उठाया जा रहा है। बच्चा पार्क और पल्लवपुरम समेत पांच रैन बसेरों में गद्दे-रजाई तक नहीं हैं। खिड़कियां टूटी हुई हैं। मंगतपुरम, परतापुर और मुल्तानगर में रात दस बजते ही रैन बसेरे में ताला लग जाता है।
रैन बसेरे में रहते हैं एलएंडटी के कर्मचारी
मंगतपुरम, परतापुर में नगर निगम के रैन बसेरे में रैपिड प्रोजेक्ट पर कार्य करने वाले एलएंडटी के कर्मचारी रहते हैं। कोई गरीब वहां पहुंचता है तो ये कर्मचारी उसे भगा देते हैं। कई बार इसकी शिकायत निगम में की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
शहर में 12 रैन बसेरा
रैन बसेरों के प्रबंधक राकेश गौड़ ने बताया कि घंटाघर स्थित टाउन हॉल, बच्चा पार्क, मंगतपुरम, सुरजकुंड, शेरगढी, तिरंगा गेट, मेडिकल, पल्लवपुरम, कासमपुर कंकरखेड़ा, खडौली, परतापुर और मुल्तान नगर में नगर निगम के रैन बसेरे है। शहर में अन्य चार रैन बसेरे डूडा परियोजना के तहत है।
रैन बसेरों पर छह-सात लोग आ रहे हैं। व्यवस्था बेहतर बनाने का प्रयास जारी हैं। चार रैन बसेरों का सोमवार को निरीक्षण किया था। भैसाली, सोहराब गेट डिपो व प्यारेलाल अस्पताल में अस्थाई रैन बसेरे भी बनाए गए हैं। -प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त