अखंड ज्योति जलाएं
इसके पश्चात सर्वप्रथम लक्ष्मी गणेश जी की आराधना करके फिर माँ दुर्गा से प्रार्थना करें- ‘हे माँ दुर्गा आप नौ दिन के लिए इस चौकी में विराजिए’। इसके बाद सबसे पहले मां को दीपक दिखाइए और फिर धूप, फूलमाला, इत्र समर्पित करें। फल, मिठाई अर्पित करें।
नवरात्री के प्रथम दिन ही अखंड ज्योति जलाई जाती है जो नौ दिन तक जलती रहती है। दीपक के नीचे चावल रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तथा सप्तधान्य रखने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त इस वर्ष सीमित समय तक होगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त में सबसे शुभ होगा। इंडियन काउंसिल आफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि संपूर्ण प्रतिपदा चित्रा और वैधृति से युक्त होने के कारण अभिजीत मुहूर्त ही ग्राह्य होगा। लेकिन किसी कारणवश अगर भक्त इन समयों में स्थापना न कर पा रहे हो तो सुबह 06:30 से 08:00 बजे तक भी घट स्थापना कर सकता है। स्थिर लग्न प्रात: 09:25 से 11:44 बजे तक होगा।
देश-दुनिया में उथल-पुथल के संकेत
हर साल शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन व प्रस्थान विशेष तरीके से होता है। इस साल मां दुर्गा का आगमन पालकी (डोली) पर हो रहा है। इसका अर्थ है कि विश्व में कुछ नया होने वाला है। परिवर्तन अथवा विनाश दोनों की संभावना है।
विश्व में राजनीतिक उथल-पुथल, प्राकृतिक आपदाओं से जन धन हानि और कई देशों अथवा प्रांतों में छत्र भंग अर्थात राजा या सता परिवर्तन होगा। पालकी में विराजमान मां दुर्गा जब आती है तो महिला शक्ति का अभ्युदय होता है। नारी शक्तियों को विश्व पहचानता है और उन्हें सम्मान देता है।
प्रथम दिन बन रहे शुभ योग
गुरुवार को चित्रा नक्षत्र होने से चर योग बनता है। चर योग में आरंभ होने वाले नवरात्र शुभ माने गए हैं। इस बार नवरात्र की शुरुआत चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में होगी। इसलिए घट स्थापना अभिजीत मुहूर्त में करना श्रेष्ठ रहेगा। इसी प्रकार नवरात्र में चार बार रवि योग बनेगा। यह योग उन्नति और समृद्धि देता है।