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आखिर खाएं तो क्या: घी हो या तेल, जारी है मिलावट का खेल, खाद्य पदार्थों के 322 नमूने फेल

Mon, 07 Mar 2022 03:20 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के चलते मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कसा जाता है।
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दालें व सरसो तेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आखिर खाएं तो क्या। हर तरह के खाद्य पदार्थ में मिलावट है। ऐसा हम नहीं, खाद्य सुरक्षा प्रशासन की रिपोर्ट कह रही है। पिछले 11 माह में 604 खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट लखनऊ की प्रयोगशाला से आई है, जिनमें से 322 नमूने फेल निकले हैं, जो करीब 53 फीसदी है। मिठाई और मसालों में खतरनाक रंगों का मिश्रण पाया गया है। बर्फी में चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम का वर्क मिला है।

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अनारदाना और हल्दी में मेटानिल येलो नामक खतरनाक रंग की मिलावट मिली है। मिठाई को चमकाने के लिए ज्यादा मात्रा में फूड कलर का इस्तेमाल मिला है। दूध में पानी मिलाया गया था। दूध से मक्खन निकाला हुआ था, उसमें स्टैंडर्ड फैट नहीं निकला। मिल्क केक और मिल्क खोया भी अधोमानक निकले। नमकीन के सैंपल मानक पर खरे नहीं मिले हैं। 

38 लाख 10 हजार रुपये जुर्माना वसूला
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि जिन नमूनों में सेहत के लिए हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलाया जाता है, जिसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और तीन लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। मिस ब्रांड और सब स्टैंडर्ड रिपोर्ट आने पर एडीएम सिटी की कोर्ट में मुकदमा चलता है, जिसमें जुर्माने का प्रावधान है। पिछले 11 माह में 38 लाख 10 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया है। 
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आकर्षक बनाने के लिए मिलाए जाते हैं रंग
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिव कुमार ने बताया कि खाद्य पदार्थों में खतरनाक रंगों की मिलावट इसलिए की जाती है ताकि वे चमकदार और रंगीन लगें, जिससे लोग उन्हें खरीदने के लिए आकर्षित हों।

पिछले चार साल में हुई यह कार्रवाई
साल           जुर्माना
2021-22   38.10 लाख 
2020-21   45.98 लाख
2019-20   70.88 लाख
2018-19    60.73 लाख

इन स्थानों से लिए गए थे सैंपल 
किठौर, इंचौली, सदर, कंकरखेड़ा, जयदेवी नगर, अजंता कालोनी, खरखौदा, सुभाष नगर, सरधना, रोहटा, मवाना, हापुड़ अड्डा, जागृति विहार, जाकिर कालोनी, सर्वोदय नगर, दिल्ली रोड, हापुड़ अड्डा, शास्त्रीनगर, मोदीपुरम, खतौली आदि स्थानों से लिए गए। 

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मिलावटखोरों पर नहीं कसा जा रहा शिकंजा 
लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के चलते मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कसा जाता है। मिलावट के लगभग सभी मामलों में जुर्माना लगता है। सजा नहीं हो पाती है। जिले में पिछले पांच साल में सजा का कोई मामला नहीं है। शायद यही वजह है कि मिलावट के शक में कार्रवाई के बाद भी वही स्थिति हो जाती है।

हालांकि, न्यायालय से मिलावट के मामलों में अलग-अलग धाराओं में छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन ज्यादातर मामले न्यायालय की जगह प्रशासनिक कोर्ट में भेज दिए जाते हैं, जहां पर मिलावटखोर केवल जुर्माना भरकर छूट जाते हैं। इस कार्रवाई में भी लंबा वक्त बीत जाता है और मिलावटखोर खुलेआम तब तक अपना धंधा चमकाने में जुटे रहते हैं।

मिलावट से हो सकते हैं गंभीर रोग
फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि मिलावट से गंभीर किस्म के रोग हो सकते हैं। सबसे ज्यादा किडनी को नुकसान पहुंच सकता है और पेट संबंधी कई रोग हो सकते हैं। रंगों की मिलावट और अखाद्य पदार्थों से बने खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। इनके सेवन से खतरनाक बीमारी हो सकती हैं।
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